Thursday, 29 August 2019

Happy pola


⍟☆⍣ पोला ⍣☆⍟

#पोला हमारे यहाँ मध्य 🌎भारत मे ज्यादा मनाया जाता है। यानी महाराष्ट्र मे सबसे ज्यादा 😃फिर मध्य प्रदेश और छत्तीसगछ व राजस्थान व अन्य राज्यो  मे भी मनाया जाता है।

👉इस दिन का महत्व यह है कि जो किसानों के साथी जो बैल यानी (Bull) की 🤠शादी की जाती है। और बैलों को सजाया🐾 जाता है और यह दिन किसानों का परा खत्म होने पर बैलों की 😍खुशी को मनाने के लिए ये त्योहार का प्रत्येक वर्ष प्रयोजन किया जाता है।


+प्रकृति को😇 कुरान की पवित्र😀 पुस्तक में सच्चाई का प्रतिबिंब माना जाता है।  हिंदू धर्मग्रंथ प्रकृति के तत्वों - पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और😙 अंतरिक्ष में निहित देवत्व पर भी जोर देते हैं।  धार्मिक पुस्तकें, किसी भी संस्कृति में मूल्यों का प्रमुख स्रोत, 😲पर्यावरण के महत्व को😙& पहचानती☝ हैं, जो हमें प्रकृति के साथ सद्भाव में रहने के लिए प्रेरित करती हैं।

 #भारत में 😵आदिवासी समुदाय इस बात की मिसाल देते रहे हैं कि कैसे धर्म और संस्कृति😙 लंबे समय से प्रकृति के संरक्षण का समर्थन करते₹ रहे हैं।  जंगलों में रहने वाले स्वदेशी समुदायों ने😵 अपनी क्षेत्रीय जैव विविधता का संरक्षण किया है जो उन्हें निर्वाह करता है।  गरीबी और अशिक्षा शायद ही पारिस्थितिकी😋 तंत्र की उनकी😙 शानदार समझ में बाधा है।  प्रकृति और वन्यजीवों का संरक्षण पहले आता है, और ये विश्वास स्पष्ट रूप से उनके त्योहारों, लोककथाओं, कलाओं🤝 और अन्य सांस्कृ_तिक😋 प्रथाओं में परिलक्षित होते हैं।  किसान जो अभी भी पारंपरिक कृषि तकनीकों का उपयोग करते हैं, मुख्य रूप से पशुधन पर निर्भर करते हैं।

 #21 अगस्त की पूर्व संध्या पर, अहमदनगर, महाराष्ट्र के अकोले 🌎तालुका के एक आदिवासी गाँव, पुरूशवाड़ी की मेरी पहली यात्रा के दौरान, गाँव की महादेव कोली जनजाति मानव-पशु संबंधों का त्योहार बिला🐧 पोला मना रही थी।  यह अपने जुगनू🧐 त्योहार के लिए प्रसिद्ध गाँव है।  मेरे मेजबान संगठन ग्रासरूट्स जर्नीज़ ने 2007 में टिकाऊ और जिम्मेदार पर्यटन के माध्यम से गाँव में आजीविका के अवसर पैदा करने के लिए अपना पहला🤷‍♂ रूरल टूरिज्म मॉडल यहाँ स्थापित किया था।&पुरुषवाड़ी के ग्रामीण 2-3 दिन पहले त्योहार 😃की तैयारी शुरू करते हैं। पुरुषवाडी से 🤩लगभग 9 किमी दूर एक छोटे से शहर राजुर में बाजार सजावटी वस्तुओं, रंगों, बैल की मूर्तियों, खिलौनों, बैल के सिर के बैल और गियर के लिए अन्य आभूषणों🤜 के लिए एक भ्रम बन जाता है। यह अचा😘नक एक खूबसूरत जगह ब।  जाता है।🙌  आसपास के गांवों के किसान अपने परिवार के साथ आते हैं। त्योहार के दिन, प्रत्येक परिवार👌। अपने बैल को जल धाराओं में ले जाने की पारंपरिक रस्म के साथ शुरू होता है।।  वे हल्दी पेस्ट🤝 और घर के बने सफेद मक्ख।न से अपने। कं।धों की मालिश करते हैं। उन्हें सींग से पूंछ तक धोया जाता😗 है। लौटने के बाद, बैल के सींग और शरीर को चित्रित किया जाता है। बच्चों को बुल के आकार में एक लकड़ी का खिलौना उपहार में दिया जाता है, जिसे 'बेलीजोडी' कहा जाता है।।

यह त्यौहार महाराष्ट्र में सबसे अच्छी तरीके से मनाया जाता है यहां पर 😃लोग लकड़ी के बैल बनाते हैं☝ और अच्छे तरीके से प्रयोजन करते हैं।



इस दिन गांव के बाहर मैदान में बासो से तोरन बांधकर 🤩शाम के समय गांव के सभी किसान अपने बैलों को सजाकर उस तोरन के नीचे खड़े करते हैं और गांव के मुख्य किसानों के यहां से 🤑आरती आती है और ग्रामवासी सभी😊 एक एक से उनके पैर पड़ते हुए आगे जाते हैं और सभी के पैर पड़कर हो जाते तो तब बाजा बजा कर सभी बैलों को वहां👏 से दौड़ाया जाता और फिर बैलों को घर पर खाना खिलाया जाता  है



और इसके दूसरे दिन 🐼नारबोद बनाई जाती है जिससे बुरा👏इयों का नाश होता है। और इस दिन घरों में मीठे पकवान बनाए जाते हैं और बड़े अच्छे से😗 इस त्यौहार को मनाया जाता हैं

⍟☆⍣ HAPPY POLA ☆⍟

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