Sunday, 11 August 2019

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Happy Rakhsha Bandhan




रक्षा बंधन का महत्त्व ;- यह पर्व भाई -बहन के रिश्तों की अटूट डोर का प्रतीक है. भारतीय संस्कृति परम्पराओं का यह एक ऎसा पर्व है, जो केवल भाई बहन के स्नेह के साथ साथ हर सामाजिक संबन्ध को मजबूत करता है।


              ★ रक्षा बंधन के लिये कुछ खास ★
रक्षा बंधन

          रक्षा बंधन भाई और बहन की सच्ची एक डोर है


         रक्षाबन्धन सावन का आखिरी दिन होता है इसीकारण इसे श्रावणी (सावनी) या सलूनो भी कहते हैं।
हिन्दू धर्म के सभी धार्मिक अनुष्ठानों में रक्षासूत्र बांधते समय पण्डित या आचार्य संस्कृत में एक श्लोक का उच्चारण करते हैं, #जो कि राजा बलि से जुड़ा हुआ है जिसमें कहा जाता है जिस रक्षासूत्र से महान शक्तिशाली दानवेन्द्र राजा बलि को बांधा गया था, उसी सूत्र से मैं तुझे बांधता हूँ, तू अपने संकल्प से कभी भी विचलित न हो।
#भारत के कई राज्यों में इस दिन बहनों की ओर से भाई के कान के ऊपर भोजली या भुजरियां लगाने की परंपरा है, जो कि भाईयों के लंबी उम्र के लिए किया जाता है।
राखी प्यार और वचन का☄ त्यौहार है इसलिए इसका प्रयोग भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम में जन जागरण के लिये किया गया था, जो कि गुरूदेव रविंद्र नाथ टैगोर ने चलाया था

फूलों का तारों का, सबका कहना है
एक हज़ारों में मेरी बहना है
सारी, उमर, हमें संग रहना है
फूलों ...

#देखो हम तुम दोनो हैं एक डाली के फूलों#
#मैं न भूला तू कैसे मुझको गई भूल#

#आ मेरे पास आ, कह जो कहना है, एक हज़ारों ...
जीवन के दुखों से, यूँ डरते नहीं हैं#
ऐसे बचके सच से गुज़रते नहीं है#
सुख की है चाह तो, दुख भी सहना है, एक हज़ारों ...#


#कामयाब लोग अपने फैसल
से दुनिया बदल देते हैं#
#नाकामयाब लोग दुनिया के डर से अपने फैसले बदल लेते हैं#

#चिन्ता उतनी करो की काम हो जाए
इतनी नहीं की जिंदगि तमाम हो जाए#

रक्षाबंधन की पूजा विधि।

रक्षा - बन्धन

हिन्दुओं के चार प्रसिद्ध त्यौहारों में से रक्षा बन्धन का
त्यौहार एक है । यह श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है । यह मुख्यतया भाई - बहन के स्नेह का त्यौहार है । इस दिन बहन - भाई के हाथ पर राखी बाँधती है और माथे पर तिलक लगाती है । भाई प्रतिज्ञा करता है कि यथाशक्ति मैं अपनी बहन की रक्षा करूँगा । एक बार भगवान कृष्ण के हाथ में चोट लगने से रक्त बहने लगा था तो द्रौपदी ने अपनी साड़ी फाड़कर उनके हाथ में बाँध दी थी। इसी बन्धन से ऋणी श्रीकृष्ण ने दुःशासन द्वारा चीर हरण के समय द्रौपदी की लाज बचायी थी । _ _ मध्य कालीन इतिहास में एक ऐसी घटना मिलती है जिसमें चित्तौड़ की रानी कर्मवती ने दिल्ली के मुगल बादशाह हुमायँ के पास राखी भेजकर अपना भाई बनाया था । हुमायूँ ने राखी की इज्जत की और उसके सम्मान की रक्षा के लिए गुजरात के बादशाह से युद्ध किया । कथा : प्राचीन समय में एक बार# देवताओं और दानवों में बारह वर्ष तक घोर संग्राम चला । इस संग्राम में राक्षसों की जीत हुई और देवता हार गए ।# दैत्य राज ने तीनों लोकों को अपने वश में कर लिया तथा अपने को भगवान घोषित कर दिया । दैत्यों के अत्याचारों से देवताओं के राजा इन्द्र ने देवताओं के गुरु बृहस्पति से विचार - विमर्श किया और रक्षा विधान करने को कहा । श्रावण पूर्णिमा को प्रात : काल रक्षा का विधान सम्पन्न किया गया । येन बद्धोबली राजा दानवेन्द्रा महाबलः । #तेन त्वामभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल ॥ उक्त मंत्रोचार से गुरु बृहस्पति ने👀 श्रावण पूर्णिमा के दिननिशान किया । सह धर्मिणी इन्द्राणी के साथ वत्र संहारक बहस्पति की वाणी का अक्षरश पालन किया । इन्द्राणी ने बादाण परोहितों द्वारा स्वस्तिवाचन कराकर इन्द्र के दायें हाथ में मासत्र को बाँध दिया । इसी सूत्र के बल पर इन्द्र ने दानवों पर विजय प्राप्त की ।

       


Happy Rakhsha Bandhan







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