Tuesday, 20 August 2019

Happy janmashtami


     जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं

🙏आप सभी देशवासियों को हमारी तरफ से जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं🙏
  

🇮🇳हिंदुओं के प्रमुख त्‍योहारों में से एक जन्‍माष्‍टमी में☄ अब अधिक समय शेष नहीं है। 😑जन्‍माष्‍टमी को लेकर हर बार की तरह इस बार भी 👌असमंजस की स्थिति है। कहीं यह 23 अगस्‍त को तो कहीं 24 अगस्‍त को मनाए जाने की बात हो रही है। #पौराणिक मान्‍यताओं के अनुसार भगवान कृष्‍ण का जन्‍म भाद्रपद यानी भादौ मास के कृष्‍ण 🌗पक्ष की अष्‍टमी को हुआ था।# यह तिथि 23 अगस्‍त को पड़ रही है। @मगर कुछ स्‍थानों पर 24 अगस्‍त को भी मनाए जाने की तैयारी है। ब्रज क्षेत्र के अधिकांश स्‍थानों पर 24 अगस्‍त को जन्‍माष्‍टमी मनाए जाने की बात हो रही है। #आइए जानते हैं इस त्‍योहार से जुड़ी खास बातें…👇

1   #कृष्‍ण का जन्‍म भादो माह के कृष्‍ण पक्ष की अष्‍टमी को हुआ था#
2     #श्रीकृष्‍ण को विष्‍णु का आठवां अवतार माना जाता है#
3    #देश भर में जन्‍माष्‍टमी धूमधाम से मनाई जाती है#

🌖भाद्र मास के कृष्‍ण पक्ष की जिस अष्‍टमी को भगवान कृष्‍ण का जन्‍म हुआ था #उस रात रोहिणी नक्षत्र की शुभ घड़ी थी। 🌾जिस वर्ष यह संयोग होता है उस वर्ष की जन्‍माष्‍टमी को बहुत ही शुभफल🌾दायक माना जाता है। #भगवान कृष्‍ण प्रसन्‍न होकर भक्‍तों के जीवन की सारे कष्‍टों को दूर करते हैं।


#मिश्री से मीठे नन्द लाल के बोल,
इनकी बातें हैं सबसे अनमोल,#
#जन्माष्टमी के इस पावन अवसर पर,
दिल खोल के जय श्री कृष्ण बोल.#
#हमारे दुलारे वही सबसे प्यारे,
माखन के लिए झगड़ जाए,#
#गोपियां देखकर आकर्षित हो जाए लेकिन सबके रखवाले,#
#तभी तो सब के दुलारे
हैप्पी जन्माष्टमी कन्हैया#


श्री कृष्ण जन्माष्टमी

👇भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी को 👉रात के बारह बजे मथुरा के ✌राजा कंस की जेल में वासुदेव जी की पत्नी देवी देवकी के गर्भ से सोलह कलाओं से युक्त भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ था । इस 🥰तिथि को रोहिणी नक्षत्र का विशेष माहात्म्य है । इस दिन देश के समस्त मन्दिरों का श्रृंगार 🤠किया जाता है । कृष्णावतार के उपलक्ष में झाँकियाँ सजायी जाती हैं । 🤷‍♂भगवान कृष्ण का श्रृंगार 🤝करके झूला सजाया जाता है । #स्त्री पुरुष रात के बारह बजे तक व्रत रखते हैं । रात को बारह बजे शंख तथा घंटों की आवाज से श्रीकृष्ण के जन्म की खबर 😇चारों दिशाओं में गूंज उठती है । भगवान कृष्ण की आरती उतारी जाती 🧐है और प्रसाद वितरण किया जाता है । प्रसाद ग्रहण कर व्रत को खोला 😙जाता है । कथा : द्वापर युग में पृथ्वी पर राक्षसों के अत्याचार बढ़ने लगे । पृथ्वी गाय का रूप धारण कर अपनी कथा सुनाने के लिए तथा अपने☝ उद्धार के लिए ब्रह्माजी के पास गई । ब्रह्माजी सब देवताओं को साथ लेकर पृथ्वी को😜 विष्णु के पास क्षीर सागर ले गये । उस समय भगवान विष्णु अनन्त शैया पर शयन कर रहे थे । स्तुति करने पर भगवान की निद्रा भंग हो गई ।
भगवान ने ब्रह्मा एवं सब😵 देवताओं को देखकर उनके आने का कारण पूछा तो पृथ्वी बोली - भगवान मैं पाप के बोझ से दबी जा रही हूँ । मेरा उद्धार कीजिए । यह सुनकर विष्णु बोले - मैं ब्रज मण्डल😋 में वसुदेव की पत्नी देवकी के गर्भ से जन्म लूँगा । तुम सब देवतागण ब्रज भूमि में जाकर यादव वंश में अपना शरीर धारण करो । 😲इतना कहकर भगवान अन्तर्ध्यान हो गए । इसके पश्चात् देवता ब्रज मण्डल में आकर यदुकुल में नन्द - यशोदा तथा गोप गोपियों के रूप में पैदा हुए । द्वापर युग के अन्त में मथुर , में उग्रसेन 🤷‍♂राजा राज्य करते थे । उग्रसेन के🙂 पुत्र का नाम कंस था । कंस ने उग्रसेन को बलपूर्वक सिंहासन से उतारकर जेल में डाल दिया और स्वयं राजा बन गया । कंस की😙 बहन देवकी का विवाह यादव 😲कुल में वासुदेव के साथ निश्चित हो गया । जब कंस देवकी को विदा करने के लिए रथ के साथ 🐧जा रहा था तो आकाशवाणी हुई कि " हे कंस ! जिस देवकी को तू बड़े प्रेम से विदा कर रहा है उसका आठवाँ पुत्र तेरा संहार करेगा । आकाशवाणी की बात सुनकर कंस क्रोध से भरकर देवकी को मारने को तैयार हो गया । उसने सोचा - न देवकी होगी न उसका कोई पुत्र होगा ।😒 वासुदेव जी ने कंस को🐾 समझाया कि तुम्हें देवकी से तो कोई भय नहीं है । देवकी की आठवीं सन्तान☝ से तुम्हें भय है । इसलिये मैं इसकी आठवीं सन्तान को तुम्हें सौंप दूंगा । तुम्हारे समझ में जो 😀आये उसके साथ वैसा ही व्यवहार करना । कंस ने वासुदेव जी की बात स्वीकार कर ली और वासुदेव - देवकी को कारागार में बन्द कर दिया । तत्काल नारदजी वहाँ आ पहुँचे और कंस से बोले कि यह कैसे पता चलेगा कि आठवाँ गर्भ कौन - सा होगा । 😵गिनती प्रथम से या अन्तिम😒 गर्भ से शुरू होगी । 🌓कंस ने नारदजी के परामर्श पर देवकी के गर्भ से उत्पन्न होने वाले समस्त बालकों को मारने का निश्चय कर लिया । इस प्रकार एक - एक करके कंस ने देवकी के सात बालकों को निर्दयता पूर्वक मार डाला । 🌗भाद्र पद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में श्रीकृष्ण का जन्म हुआ । उनके जन्म लेते ही जेल की कोठरी में प्रकाश फैल गया । वासुदेव 🍄देवकी के सामने शंख , चक्र , गदा एवं पदमधारी चतुर्भुज भगवान ने अपना रूप प्रकट कर कहा , " अब मैं बालक का रूप धारण करता🧢 हूँ । तुम मुझे तत्काल गोकुल में नन्द के यहाँ पहुँचा दो और उनकी अभी - अभी जन्मी कन्या ✊को लाकर कंस को सौंप दो । तत्काल वासुदेव जी की हथकड़ियाँ खुल गईं । दरवाजे अपने आप खुल गये । पहरेदार सो गये । वासुदेव कृष्ण 👀🌓को सूप में रखकर गोकुल 😜को चल दिए । रास्ते में यमुना श्रीकृष्ण के चरणों को स्पर्श करने के लिए बढ़ने लगीं । भगवान ने अपने पैर लटका दिए । चरण छूने के बाद यमुना घट गई । । वासुदेव यमुना पार कर गोकुल में नन्द के यहाँ गये । बालक कृष्ण को यशोदाजी की बगल में सुलाकर कन्या को 😍लेकर वापस कंस के✊ कारागार में आ गये ।🤝 जेल के दरवाजे पूर्ववत् बन्द हो गये । वासुदेव जी के हाथों में हथकड़ियाँ पड़ गईं , पहरेदार जाग गये । कन्या के रोने पर कंस को खबर दी गई । कंस ने कारागार में आकर कन्या को लेकर 🌕पत्थर पर पटक ☝कर मारना चाहा परन्तु वह कंस के हाथ से छूटकर आकाश में उड़ गई और देवी का रूप धारण कर बोली , " हे कंस ! मुझे मारने छोड़ना । " गोपाल द्वारा गोवत्साचारण की इस 😀पुण्य तिथि को पर्व के रूप में मनाया जाता है ।

⍟☆⍣Happy janmashtami⍣☆⍟
#Thanksyou
🙏🙏🙏

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