Sunday, 1 September 2019

गणेश चतुर्थी शुभ मुहूर्त स्थापना विधि



  1. 💥गणेश चतुर्थी शुभ मुहूर्त स्थापना विधि💥


👌गणेश चतुर्थी का पर्व भाद्र पक्ष शुक्ल पक्ष की तिथि के दिन मनाया जाता है शास्त्रों में ऐसी मान्यता है कि गणेश जी का जन्म भाद्र पक्ष शुक्ल🌗 पक्ष की चतुर्थी तिथि को म😍ध्यन वादी🌓 नक्षत्र और सिंह नग्न में हुआ था इसीलिए यह चतुर्थी साल में आने वाली सभी चतुर्थी में खास मानी जाती है। गणेश🌕 चतुर्थी का उत्सव लगभग 10 दिनों तक बड़े हर्ष और उल्लास से मनाया जाता है जि🐾स कारण इसे गणेश महोत्सव से भी जाना जाता है।
                    आज हम आपको साल 2019 गणेश महोत्सव तिथि शुभ😀 मुहूर्त और 10 दिनों तक चलने वाली पूजा की विधि के बारे में बताएंगे।


                        शास्त्रों के अनुसार इस पर्व में मध्यान्ह के समय कि मध्यान्ह व्यापनी🤠 चतुर्थी ली जाती है यदि इस दिन 😀मंगलवार या रविवार पड़े तो इसे महा चतुर्थी कहां जाता है
चतुर्थी😒 तिथि शुरू होंगी 😵2 सितंबर सोमवार 4:56 पर चतुर्थी तिथि समाप्त होंगी 😵3 सितंबर मंगलवार 1:53 पर गणेश पूजन का मध्यान्ह मुहूर्त का 11:05 से 1:36 तक पूजा की कुल अवधि होंगी 2 घंटे 32 मिनट चंद्र दर्शन से😀 बचने का समय 2 सितंबर 8:55 से 9:05 तक होगा गणेश चतुर्थी के दिन प्रात काल उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर😲 गणेश जी की प्रतिमा घर लेकर आए इसके पश्चात एक कलश में जल भरकर उसे बांधा जाता है और इस पर गणेश जी की प्रतिमा की स्थापना की जाती है प्रतिमा पर सिंदूर व दुर्वा चढ़ाकर षोडशोपचार क😲र विधिवत पूजन किया जाता है और दक्षिणा अर्पित करने के बाद लड्डुओं का भोग भी लगाया जाता है गणेश प्रतिमा का पूजन सायं काल के समय पर गणेश चतुर्थी तथा गणेश चालीसा, आरती के बाद नी😒चे देखते हुए चं😀द्रमा को अग्र देना चाहिए BUY NOW BOOK
चंद्रपूजन के बाद ब्राह्मणों को भोजन करवाकर दक्षिणा देनी चाहिए भाद्र मास के शुक्ल पक्ष की तिथि को गणेश महोत्सव की शुरुआत हो जाती है और लगातार 10 दिनों तक यह पर्व चलता है

गणेश चतुर्थी 

भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी गणेश चतुर्थी के | नाम से प्रसिद्ध है । इस दिन प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर सोना ,😀 तांबा , चाँदी , मिट्टी या गोबर से गणेश की मूर्ति बनाकर उसकी पूजा करनी चाहिए । पूजन के समय इक्कीस मोदकों का भोग लगाते हैं तथा हरित दुर्वा के इक्कीस अंकुर ले😀कर निम्न दस नामों पर चढ़ाने चाहिए 1 . गतापि , 2 . गोरी सुमन , 3 . अघनाशक , 4 . एकदन्त , 5 . ईशपुत्र , 6 . सर्वपिद्धिप्रद , 7 . विनायक , 8 . कुमार गुरु , 9 . इंभवक्त्राय और 18 . मूषक वाहन संत । तत्पश्चात् इक्कीस लड्डुओं में से दस लड्डू ब्राह्मणों को दान देना चाहि😒✊ए तथा ग्यारह लड्डू स्वयं खाने चाहिए । कथा : एक बार भगवान शंकर स्नान करने के लिए भागवती नामक स्था✊न पर गए । उनके चले जाने के पश्चात पार्वती ने अपने तन की मैल से एक पुतला बनाया जिसका नाम उन्होंने गणेश रखा । गणेश को द्वार पर एक मुदगल देकर बैठाया कि जब तक मैं स्नान करूँ किसी पुरुष को✊ अन्दर मत आने । देना । भोगवती पर स्नान करने के बाद जब भगवान शंकर आए तो गणेश जी ने उन्हें द्वार पर रोक दिया । कुद्ध होकर भगवान शंकर ने उसका सिर धड़ से अलग कर दिया और अन्दर चले गये । पार्वतीजी ने समझा कि भोजन में विलम्ब होने के कारण शंकर जी😒😒 नाराज हैं । उन्होंने फौरन दो थालियों में भोजन परोसकर शंकरजी ✊को भोजन करने को बुलाया । शंकरजी ने दो थाल देखकर पूछा - - दूसरा थाल किसके लिए लगाया है ? " पार्वतीजी बोली - दूसरा थाल पुत्र गणेश के लिए है । " जो बाहर पहरा दे रहा है । यह सुनकर शंकर जी ने कहा✊ , ' मैंने तो उसका सिर काट दिया है । " यह सुनकर पार्वतीजी बहुत दुःखी हुईं और प्रिय पुत्र गणेश को पुनः जीवित करने की प्रार्थना करने लगीं । शंकर जी ने तुरन्त के पैदा हुए हाथी के बच्चे का सिर काटकर बालक ✊के धड़ से जोड़ दिया । तब पार्वतीजी ने✊ प्रसन्नतापूर्वक पति - पत्र को🙂 भोजन कराकर स्वयं भोजन किया । यह घटना भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को हुई थी , इसलिए इसका नाम गणेश चतुर्थी पड़ा ।

बोलो गणपति बप्पा मोरिया

🙏🙏

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