Monday, 16 September 2019

Akbar birbal ki kahani


#सब लोग एक जैसा सोचते हैं...





#दरबार की कार्यवाही चल रही थी। सभी दरबारी एक ऐसे प्रश्न पर विचार कर😇 रहे थे जो राज-काज चलाने की दृष्टि से बे😇हद अहम न था। सभी एक-एक कर अपनी राय दे रहे थे"।
बादशाह दरबार* में बैठे यह महसूस कर रहे थे कि सबकी राय अलग है]}उन्हें आश्चर्य😇 हुआ कि# सभी एक जैसे क्यों नहीं सोचते;
#तब बादशाह अकबर ने बीरबल से पूछा, 'क्या तुम बता सकते हो कि🙂 +लोगों की राय आपस में मिलती क्यों नहीं? सब अलग_अलग क्यों सोचते हैं?’
'हहमेशाπसा नहीं होता, बादशाह सलामत!' बीरबल बोला, kकुछ समस्याएं 😇ऐसी होती हैं जिन पर सभी के विचार समान होते हैं।' इसके बा😇द कुछ और काम निपटा कर दरबार 😆की कार्यवाही समाप्त हो गई। सभी अपने-अपने घरों को लौट चले।
₹उसी शाम जबाब बीरबल और बादशाह अकबर बाग में टहल रहे थे, तो बादशाह ने फिर वही राग छेड़ दिया और बीरबल से बहस करने लगे।
तब बीरबल बाग के ही एक कोने की ओर उंगली से संकेत& क😄रता हुआ बोला, 'वहां उस पेड़ के निकट एक कुंआ है। वहांकी चलिए, मैं कोशिश करता हूं कि आपको समझा सकूं कि जब 🙃कोई समस्या जनता से जुड़ी हो तो सभी एक जैसा ही सोचते हैं।
मेरे कहने का मतलब यह है कि बहुत-सी ऐसी बातें हैं जिनको ले☺कर लोगों के विचार एक जैसे होते हैं।’
#बादशाह अकबर ने कुछ देर 😇कुंए की ओर घूरा&, फिर बोले, 'लेकिन मैं कुछ$ समझा नहीं,, तुम्हारे समझाने का ढंग कुछ अजी😇ब-सा है।' बादशाह जबकि£ जानते थे कि बीरबल +अपनी बात सिद्ध करने के लिए ऐसे ही प्रयोग करता रहता है।
'सब समझ😊😊 जाएंगे हुजूर!'
बीरबल बोला, 'आप शाही फरमान जारी कराएं कि नगर के हर घर से एक लोटा दूध लाकर बाग में स्थित इस कुंए में @डाला जाए। दिन पूर्णमासी का होगा। हमारा# नगर बहुत बड़ा है, यदि हर _घर से एक लोटा दूध🌊 इस कुएं में पड़ेगा तो☺& यह दूध से भर जाएगा’🕴
¶बीरबल की यह बात सुन बादशाह πअकबर ठहाका लगाकर )हंस •पड़े। फिर😇😇√ भी उन्होंने बीरबल के कहेनुसार फरमान< जारी कर दिया\
₹शहर भर में मुनादी +करवा दी गई कि आने वाली पूर्णमासी😇😇 के+ दिन हर घर से एक लोटा दूध लाकर शाही बाग के कुंए में डाला जाए। 6जो ऐसा नहीं& करेगा उसे सजा मिलेगी।
पूर्णमासी के दिन बाग के बाहर लोगों की कतार लग गई। इस बात का विशेष ध्यान रखा जा रहा था कि हर घर @से को😁😊ई न को😊ई वहां जरूर आए। सभी के हाथों में भरे हुए पात्र (बरतन) दिखाई दे रहे थे।😊
बादशाह अकबर और बीरबल दूर बैठे यह सब देख रहे थे औ&र एक-दूसरे को देख मुस्करा रहे थे। सांझ ढलने से पहले कुंए में दूध डालने का काम पूरा हो गया। हर #घर से दूध 🤣लाकर कुंए में 👌डाला गया था।
©जब सभी वहां से चले ^गए तो बादशाह अकबर व बीरबल नेπ कुंए के निकट ®जाकर अंदर झांका} कुंआ मुंडेर तक@ भरा हुआ था। लेकिन यह देख बादशाह अकबर को #बेहद हुई हैरानी  कि कुंए में दूध नहीं) भरा पानी (हुआ था। दूध का तो कहीं नामोनिशान तक न था।
#हैरानी भ😊री निगाहों से अकबर बा😁दशाh ने बीरबल की ओर hhदेखते हुए पूछा, '#ऐसा क्यों हुआ?₹ शाही फरमान तो" कुंए में दूध डालने का ;जारी हुआ !था, यह पानी कहां से आया? लोगों ने दूध क्यों नहीं डाला?’
बीरबल एक जोरदार ठहाका लगाता हुआ बोला, 'यही तो मैं #सिद्ध करना चाहता था हुजूर! मैंने कहा था आपसे कि बहुत-सी ऐसी बातें होती 😇हैं जिस पर लोग एक जैसा सोचते😄😊 हैं, और यह भी एक ऐसा ही मौका था।# लोग कीमती दूध बरबाद करने को तैयार न थे। वे जानते थे कि कुंए में दूध डालना व्यर्थ है। इससे उन्हें कुछ मिलने वाला नहीं था।
#इसलिए यह सोचकर कि किसी को क्या पता चलेगा, सभी पानी🙂😇 से भरे बरतन ले आए और कुंए में उड़ेल दिए।₹ नतीजा…दूध के बजाय पानी से भर गया कुंआ।’
#बीरबल की यह चतुराई🌊🌊 देख बादशाह अकबर ने उसकी पीठ👌 थपथपाई&।

🌊"दिखाया बीरबल ने सिद्ध कर 🌎 था कि कभी-कभी लोग एक जैसा 👉भी; हैं।"' सोचते"'

रेत और चीनी

बादशाह अकबर के दरबार की कार्यवाही चल रही थे, तभी एक दरबारी हा🙃थ में शीशे का एक मर्तबान लिए वहां आया। बादशाह ने पूछा- 'क्या 🙂है इस मर्तबान में?'
दरबारी बोला- 'इसमें रेत और चीनी का मिश्रण है।'
'वह किसलिए' - फिर पूछा बादशाह अकबर ने।
'माफी चा😘हता हूं हुजूर' - दरबारी बोला। 'हम बीरबल की काबिलियत को परखना चाहते हैं, हम चाहते हैं की वह रेत से चीनी का दाना-दाना अलग कर दे।'
बादशाह अब बीरबल से मुखातिब 😙हुए, - 'देख लो बीरबल, रोज 😘ही तुम्हारे सामने एक नई समस्या रख दी जाती है, अब तुम्हे बिना पानी में घोले इस रेत में से चीनी को अलग करना है।'
'कोई स😍मस्या नहीं जहांपनाह' - बीरबल बोले। यह तो मेरे बाएं हाथ का काम है, कहकर बीरबल ने मर्तबान उठाया और चल दिया दरबार से बाहर!
बीरबल बाग में पहुंचकर रुका और मर्तबान में भरा सारा मिश्रण आम के एक बड़े पेड़ के चारों और बिखेर दिया- 'यह तुम क्या कर रहे हो?' - एक दरबारी ने पूछा
बीरबल बोले, - 'यह तुम्हे कल पता चलेगा।'
अगले दिन फिर 😂वे सभी उस आम के पेड़ के नीचे जा पहुंचे, वहां अब केवल रेत पड़ी थी, चीनी के सारे दाने चीटियां बटोर कर अपने बिलों में पहुंचा चुकी थीं, कुछ चीटियां तो अभी भी चीनी के दाने घसीट कर ले जाती दिखाई दे रही थीं!
'लेकिन सारी चीनी कहां चली गई?' दरबारी ने पूछा
'रेत😅 से अलग हो गई' - बीरबल ने कहा।
सभी जोर से हंस पड़ें,
बादशाह ने दरबारी से कहा कि अब तुम्हें चीनी चाहिए तो चीटियों के बिल में घुसों।'

सभी ने जोर का ठहाका लगाया और बीरबल की अक्ल की दाद दी।

जीत किसकी

बादशाह अकब🙂र जंग में जाने की तैयारी कर रहे थे। फौज पूरी तरह तैयार थी। बादशाह भी अपने घोड़े पर सवार होकर आ गए। साथ में बीरबल भी था। बादशाह ने फौज को जंग के मैदान में कूच करने का निर्देश दिया।

बादशाह आगे-आगे थे, पीछे-पीछे उनकी विशाल फौज चली आ 😗रही थी।
रास्ते में बादशाह को जिज्ञासा हुई और उन्होंने बीरबल से पूछा- क्या तुम बता सकते हो कि जंग में जीत किसकी होगी?

हुजूर, इस सवाल का जवाब तो मैं जंग के बाद ही दूंगा। बीरबल ने क😇😊हा।

कुछ देर बा😊द फौज जंग के मैदान में पहुंच गई। वहां पहुंचकर बीरबल ने कहा- हुजूर, अब मैं आपके सवाल का जवाब देता हूं और जवाब यह है कि जीत आपकी ही होगी।

यह तुम अभी कैसे कह 🙂सकते हो, जबकि दुश्मन की फौज भी बहुत विशाल है। बादशाह ने शंका जाहिर की।

हुजूर, दुश्मन हाथी पर सवार हैं और हाथी तो सूंड से मिट्टी अपने ऊपर ही फेंकता है तथा अपनी ही मस्ती में रहता है, जब😄कि आप घोड़े पर सवार है और घोड़ों को तो गाजी मर्द कहा जाता है। 😊😇घोड़ा आपको कभी धोखा नहीं देगा।’ बीरबल ने कहा।
उस जंग में जीत बादशाह अकबर की ही हुई।





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