Sunday, 15 September 2019

Motivational story in hindi


                       | #हिसाब बराबर |


एक डॉक्टर ने नया-नया क्लीनिक खोला तो बाहर बोर्ड टाँग दिया, जि😃स पर लिखा था, "किसी भी बीमारी का इलाज़ मात्र 300/- रुपये में और अगर हम आपका इलाज़ नहीं कर पाये तो हम आपको🥰 1000/- रुपये देंगे।"
यह बोर्ड पढ़कर एक दिन एक आदमी के मन में ख्याल आया 😘कि क्यों न कोई चालाकी की जाये और 1000/- रुपये कमाये जाएँ। इसी सोच के साथ आदमी डॉक्टर के पास पहुँच गया।
डॉक्टर: आईये बैठिये, बताइये क्या तक़लीफ है आपको?
आदमी: डॉक्टर😄 साहब, मैं अपना स्वाद खो चुका हूँ। कुछ भी खाता या पीता हूँ तो स्वाद का पता ही नहीं चलता।
डॉक्टर ने पूरी बात सुनी और नर्स से कहा कि 22 नंबर वाली बोतल में से कुछ बूंदे 😇इनकी जीभ पर डाल दो। नर्स से जैसे ही बूंदे आदमी की जीभ पर डाली, आदमी एक😘 दम से चिल्लाया, "यह तो पेशाब है।"
डॉक्टर: मुबारक हो आपका स्वाद वापस आ गया।
आदमी बहुत शर्मिंदा हुआ और उसे 300/- रूपये भी गंवाने पड़े। कुछ दिनों बाद वो फिर से डॉक्टर के पास अपना हि😛साब बरा🤩बर करने पहुँच गया।
डॉक्टर: जी अब क्या तकलीफ हो गयी।
आदमी: डॉक्टर साहब, मैं अपनी यादाश्त कमज़ोर हो गयी है।
डॉक्टर ने नर्स से कहा कि 22 नंबर वाली बोतल में से दवाई नि🤑काल कर इनको दो।😛😛 यह सुन कर आदमी तुरंत बोला, "डॉक्टर साहब वो दवाई तो स्वाद वापस लाने के लिए है न।"
डॉक्टर: मुबारक हो आपकी यादाश्त भी वापस आ गयी है।



| #अपना अपना नजरिया |

एक बार एक संत अपने शिष्यों के साथ नदी में स्नान कर रहे थे | तभी एक राहगीर वंहा से गुजरा तो महात्मा को नदी में नहाते देख 🤑वो उनसे कुछ पूछने के लिए रुक गया | वो संत से पूछने लगा ” महात्म😘न एक बात बताईये कि यंहा रहने वाले लोग कैसे है क्योंकि मैं अभी अभी इस जगह पर 🤑आया हूँ और नया होने के कारण मुझे इस जगह को कोई विशेष जानकारी नहीं है |”
इस पर महात्मा ने 🤩🤓उस व्यक्ति से कहा कि ” भाई में 😛तुम्हारे सवाल का जवाब बाद में दूंगा पहले तुम मुझे ये बताओ कि तुम जिस जगह से आये वो वंहा के लोग कैसे है ?” इस पर उस आदमी ने कहा “उनके बारे में क्या कहूँ महाराज वंहा तो एक से ए😛क कपटी औ😛😘र दुष्ट लोग रहते है इसलिए तो उन्हें🤓 छोड़कर यंहा बसेरा करने के लिए आया हूँ |”  महात्मा ने जवाब दिया बंधू ” तुम्हे इस गाँव में भी वेसे ही लोग मिलेंगे कपटी दुष्ट और बुरे |”  वह आदमी आगे बढ़ गया |
थोड़ी देर बाद एक और राहगीर उसी मार्ग से गुजरता है औ😛र महात्मा से प्रणाम करने के बाद कहता है ” महात्मा जी मैं इस गाँव में नया हूँ और परदे😛श से आया हूँ और इस ग्राम में बसने की🤑 इच्छा रखता हूँ लेकिन मुझे यंहा की कोई खास जानकारी नहीं है इसलिए आप मुझे बता सकते है ये जगह कैसे है और यंहा रहने वाले लोग कैसे है ?”
महात्मा ने इस पर फिर वही प्रश्न किया और उनसे कहा कि ” मैं😛 तुम्हारे सवाल का जवाब तो दूंगा लेकिन बाद में पहले तुम मुझे ये बताओ कि तुम पीछे से जिस देश से भी आये हो वंहा रहने वाले लोग कैसे है ??”
उस व्यक्ति ने महात्मा😝 से कहा ” गु😛रूजी जन्हा से मैं आया हूँ वंहा भी सभ्य सुलझे हुए और नेकदिल इन्सान रहते है मेरा वंहा से कंही और जाने का कोई मन नहीं था लेकिन व्यापार के सिलसिले में इस और आया हूँ और यंहा की आबोह🥰वा भी मुझे भा गयी है इसलिए मेने आपसे ये सवाल पूछा था |” इस पर महात्मा ने उसे कहा बंधू ” तुम्हे यंहा भी नेकदिल और भले इन्सान मिलेंगे |”  वह राहगीर भी उन्हें प्रणाम करके आगे बढ़ गया |
शिष्य ये😙 सब देख रहे थे तो उन्हों🤑ने ने उस राहगीर के जाते ही पूछा गुरूजी ये क्या अपने दोनों राहगीरों को अलग अलग जवाब दिए हमे कुछ भी समझ नहीं आया | इस पर मुस्कुराकर महात्मा😍 बोले वत्स आमतौर पर हम आपने आस पास की चीजों को जैसे देखते है वैसे वो होती नहीं है इसलिए हम अपने अनुसार अपनी दृष्टि (point of view) से चीजों को दे🤗😙खते है और ठीक उसी तरह जैसे हम 😍है | अगर हम अच्छाई देखना चाहें तो हमे अच्छे लोग मिल जायेंगे और अगर हम बुराई देखना चाहें तो हमे बुरे लोग ही मिलेंगे | सब देखने के नजरिये ( point of view in hindi ) पर निर्भर करता है ।


यही जिन्दगी का सार है |


Thanks🙏🙇
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