Wednesday, 2 October 2019

Amazing facts about Garba। Navratri special।


Amazing  facts about Garba


    गरबा भारत का एक लोकप्रिय नाचे है। जिसको नवरात्रि के पावन अवसर पर नाचते हैं,मां दुर्गा के समक्ष। गरबा भारत के गुजरात राज्य में सबसे ज्यादा जोरों शोरों से मनाया जाता है। यह जरूरी नहीं कि आपको गरबा के लिए गुजराती जाना है, भारत देश में हर त्यौहार को हर राज्य में मनाया जाता है। इसलिए आज हमको गरबा से जुड़े कुछ अमेजिंग फैक्ट बताने जा रहे हैं।

गरबा शब्द कहां से आया ? और इसका मतलब।
गरबा का नाम संस्कृत शब्द से आया है। जो कि 2 शब्दों के मेल से बना है, जो कि गरबा और दीप से आया है  जिसे गर्भदिप भी कहा जाता है। गर्भ दीप का मतलब है मिट्टी के मटके में दीपक, यह मटका प्रकाश को उसी प्रकार प्रदर्शित करता है, जिस प्रकार मां की कोख में उसकी संतान।


गरबा में शुरुआती समय से लेकर, अब तक उसने बदलाव।
       पहले के दौर में महिलाएं अपने  सर में मिट्टी का मटका रखती थी। जिसमें एक दीपक होता था। मटके में एक चांदी का सिक्का और नारियल रखकर एक गोले में घूमकर गरबा करती थी। और अपने मुंह से गाना भी गाती थी। परंतु समय के चलते गरबा में कई सारे परिवर्तन आए। अब मटके को सर में न रख के के गोले के बीच में रख देते हैं, या फिर माता रानी के प्रतिमा के समक्ष रख देते हैं। और फिर गरबा करते हैं। उस प्रतिमा या फिर उसके के आजू-बाजू गोला बना कर।

गरबा का महत्व।
    गरबा मां दुर्गा के सम्मान में किया जाता है। नवरात्रि के पहले दिन में गरबा का दीप जलाकर स्थापना की जाती है। और फिर गरबा किया जाता है। गरबा भरतनाट्यम और ओडिसी से काफी मिलता-जुलता है।

गरबा और डांडिया में अंतर।
    गरबा और डांडिया दोनों ही भारत के लोकप्रिय नाचे और दोनों ही गुजरात राज्य से बहुत जुड़े हुए हैं। परंतु डांडिया जो कि मथुरा श्रीकृष्ण की भूमि है वहां से सर्वप्रथम शुरू हुआ था । और आज पूरे भारत में मशहूर है। और गरबा सर्वप्रथम गुजरात से ही शुरू हुआ था। और पूरे भारत में मशहूर है डांडिया में लकड़ी की छोटी छड़ी को लेकर नाचते हैं। जबकि गरबा में हाथ और पैरों को। और अब आप आसानी से गरबा और डांडिया में अंतर समझ गए होंगे और आप लोगो को बता भी सकते हैं।

गरबा गोले में ही क्यों करते हैं ?
गरबा गोले में ही क्यों करते हैं ? शायद आपने यह सोचने की कभी कोशिश नहीं की होगी कि, गरबा को गोले में ही क्यों का किया जाता है? परंतु इसका भी बहुत बड़ा कारण है। यह माना जाता है कि जब हम गरबा को गोले में करते हैं। तो मनुष्य की जन्म मृत्यु और जन्म को प्रदर्शित करती है परंतु मां दुर्गा अपना अस्तित्व कभी नहीं बदलते और एक ही जगह पर अटूट रहते हैं। यह प्रदर्शित करता है शायद अब आप यह समझ गए होंगे कि गरबे को गोले में ही क्यों करते हैं।

गरबा कहां-कहां मशहूर है।
    गरबा जो कि भारत का लोकप्रिय नाच है। यह केवल भारत में ही नहीं जबकि विश्व प्रसिद्ध है बात करें अगर से यूएसए और कनाडा की तो यहां 20 से भी अधिक यूनिवर्सिटी हैं जो कि नवरात्रि के अवसर पर गरबा का आयोजन करती है। जिसमें विदेशी लोग बहुत बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं और विदेश में रहने वाले गुजराती तो इसमें इतना उत्साह भर देते हैं कि, ऐसा लगता है कभी एक बार गुजरात में आकर जरूर करवा किया जाए।

गरबा क्वीन फाल्गुनी पाठक।
गरबा क्लीन फाल्गुनी पाठक का जन्म 12 मार्च 1964 को वडोदरा गुजरात में हुआ था। फाल्गुनी पाठक को डांडिया Queen भी कहा जाता है। इन्होंने अपने डांडिया और गरबा के गाने गाने की शुरुआत 1997 से की थी और वह आज तक उनके गाने इतने मशहूर हैं कि हर गरबा में उनके ही गाने बसते हैं।


     गरबा केवल इतने में ही खत्म नहीं होता गरबा कुछ जितना ज्यादा समझे उतना ज्यादा वह हमें नई नई सी के सिखाता है और भारत से जुड़े हुए हर त्यौहार और हर एक चीज तो हर एक नई सीख देती है।
Happy Navratri

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