Wednesday, 13 November 2019

Ayodhya Ram Mandir history। Ayodhya Ka Faisla

Ayodhya Ram Mandir historyअयोध्या राम मंदिर का इतिहास

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Ram Mandir


अयोध्या राम मंदिर कांड सन् 1528 - 2019  तक की का कांड है। इस कांड के विरुद्ध कई सारे दंगे फसाद हुए जिसमें 4000 से भी ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है।अयोध्या राम मंदिर का मुद्दा रामचरित्र मानस के लिखे जाने के बाद ही उठा था। 9 नवंबर 2019 को अयोध्या का फैसला आया जिस फैसले में पांच जज शामिल थे और उन पांच जजों को रंजन गोगोई साहब ने लीड किया था और फैसला आने के बाद देश में शांति बनी रही और कोई दंगे फसाद नहीं हुए।यह मामला लगभग साढे 300 सालों से चल रहा था।तो आइए जानते हैं सन 1528-2019 तक की का राम मंदिर का इतिहास।


1528 बाबरी मस्जिद कांड।

सन् 1528 में बाबरी मस्जिद का निर्माण हुआ। जिसको मुगल शासक बाबर ने बनवाया था। बाबरी मस्जिद बनवाई एकमात्र उद्देश्य था कि मुस्लिम को बढ़ावा देना। क्योंकि वह मुस्लिम शासक था और हिंदुओं के खिलाफ था।
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Babri Masjid 

                                  परंतु बाबरी मस्जिद की बड़ी के 50 साल तक कोई भी विवाद और कोई भी दंगे की स्थिति नहीं बनी थी।  और 50 साल बाद राम चरित्र मानस आई और उसने अयोध्या के बारे में बहुत ज्यादा लिखा हुआ था। जिसमें बताया गया था कि अयोध्या राम जी की नगरी है यह उनका जन्म स्थान है। और राम जी का संपूर्ण जीवन चरित्र रामचरितमानस में समाहित का और इसे पढ़ने के बाद लोगों में जागरूकता आई और लोग जागरुक हुई कि नहीं जहां बाबरी मस्जिद बनी है वह राम जी का जन्म स्थान है हमें राम जी को हक दिलाना ही होगा।

हिंदू संगठन की स्थापना।

रामचरितमानस पढ़ने के बाद लोगों में जागरूकता आए और लोग जागरुक हो और नंबर ऑफ टेंपल बनवाने की परंपरा चालू हुई जिसमें हर घर में राम जी का मंदिर बनवाना था और हर हिंदू ने इस बहुमत का साथ दिया और हर घर में मंदिर बने और इसे देखकर और ज्यादा लोगों में जागरूकता है।

1611 का कांड।

1611 में विदेशी यात्री विलियम फिंच ने बताया कि अयोध्या राम की जन्मभूमि है और लोगों को और जागरूक किया। विलियम फिंच ने बताया कि यह कभी राम की जन्मभूमि हुआ करती थी। इनके बारे में कई सारे सबूत ढूंढ कर विलियम फिंच ने लोगों के सामने लाएं।

1717 का कांड।

1717 में जयसिंह द्वितीय ने राम जी की पूजा पाठ करीबा चालू किया और लोगों को और जागरूक किया कि यह राम की भूमि है।

1768 का कांड।

1768 में जोसेफ ने बताया कि जहां बाबरी मस्जिद है वहां कभी राम का जन्म स्थान हुआ करता था और यहां राम की भूमि है और इसके कई का इतिहास में मौजूद हैं। क्योंकि जोसेफ एक इतिहास कारी थी।

सबसे बड़ा विवाद 183 का।

सबसे पहला विवाह 2053 में हुआ था जिसमें हिंदी मुस्लिम को जमीन सेट कर दी गई थी पूजा पाठ के लिए। यह सबसे पहला सबसे बड़ा विवाद माना जाता है। क्योंकि इसमें जमीन से ऑपरेट होने के बाद हिंदुओं में और जादू जागरूकता की थी।

1855 का कांड।

अट्ठारह सौ पचासी में महंत रघुवर दास ने फैजाबाद न्यायालय में अपील की थी कि जहां बाबरी मस्जिद है। वहां एक राम जी का मंदिर भी होना चाहिए और वह हमें मंदिर बनवाने की अनुमति दे दी। परंतु फैजाबाद कोर्ट ने उनका। अस्वीकार कर दिया था।

दिसंबर 22-23 1949 का कांड।

दिसंबर 22-23 1949 यह दिन इतिहास का बहुत बड़ा दिन माना जाता है। क्योंकि इस दिन रहस्यमई तरीके से बाबरी मस्जिद के अंदर राम जी की दो से तीन मूर्तियां मिली थी और इसका इतिहास आज तक किसी को नहीं पता चला लोगों की आस्था बन गई थी कि यह राम जी का चमत्कार है। परंतु कोर्ट ने इसमें इन्वेस्टिगेशन की और पता चला कि यह मूर्ति किसी ने जानबूझकर बाबरी मस्जिद के अंदर रखी है। परंतु उस वक्त पढ़े लिखे लोगों की संख्या कम थी इसलिए उन लोगों ने इसे राम जी का चमत्कार ही माना और इसी ही स्वीकार किया।

1950 का कांड।

गोपाल विश्वराज और रामचंद्र दास एक बार और फैजाबाद कोर्ट गए ताकि बाबरी मस्जिद के अंदर राम जी की पूजा करने की अनुमति मिले परंतु फैजाबाद कोर्ट ने फिर से उनकी अपील को अस्वीकार कर दिया और उन्हें बेदखल कर दिया। परंतु गोपाल विश्वराज और रामचंद्र दास ने अपनी कोशिशों को छोड़ा नहीं और मेहनत से मूर्ति पूजा के लिए काम करने लगे। 

1959 निर्मोही अखाड़ा कांड।

सन 1959 में निर्मोही अखाड़ा ने फैजाबाद कोर्ट में कड़ी अपील की कि यह बाबरी मस्जिद वाली डिस्प्यूट जमीन हमारी है और हम यह मूर्ति पूजा करेंगे और इसके बाद हिंदुत्व में तो और भी ज्यादा जागरूकता गई। क्योंकि निर्मोही अखाड़ा सन 1959 में ही प्रारंभ हुआ था।
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Jay Shri Ram

1961 का कांड।

सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड, यूपी ग्रुप ने भी कड़ी अपील की थी कि हमें बाबरी मस्जिद के अंदर राम जी की पूजा पाठ करने का अधिकार होना चाहिए और फैजाबाद ने इन दो अपीलों के बाद इस बात पर कड़ा गौर किया था।

1980 कांड।

1980 के बाद पॉलिटिकल बहुत फैल गया था और लोगों से मंदिर बनवाने के नाम पर वोट मांगे जाने लगे थे और लोगों यही आस लेकर पॉलिटिक्स को वोट भी दे देते थे कि हमारा भी कभी राम मंदिर बनेगा और बाबरी मस्जिद टूटेगी। पर बाद में लोगों में जागरुकता आएगी सभी राजनीतिज्ञ सिर्फ और सिर्फ वोट मांगने के लिए ही यह सब कर रहे हैं। इसलिए अब हमें कोई कड़ी सरकार चुनी होगी।

फरवरी 1986 का कांड।

फरवरी 1986 में फैजाबाद कोर्ट अनुमति देता है कि बाबरी मस्जिद के अंदर आप राम जी की मूर्ति पूजा कर सकते हैं कि केवल राम जी की जन्मभूमि है और लोग इतने ज्यादा प्रसन्न हो जाते हैं। इस फैसले को लेकर कि हिंदू तुम्हें तो एक गठन बन जाता है और लोग और अवेयरनेस आते हैं क्या वह मंदिर भी बनेगा सर यहां फिर जमीन विवादित लफड़ा हो जाता है।

अगस्त 1989 का कांड

अगस्त 1990 में यह मामला उठाकर आखिरकार जहां बाबरी मस्जिद है वह जमीन है किसकी वह मुसलमानों की है या वह हिंदुओं की है वह बाबरी मस्जिद रहेगी या वहां राम जी का मंदिर रहेगा यह फैसला उठता है और लोगों में एक अलग सी चहल-पहल उठ जाती है और लोग इस बात को जानने के लिए बहुत ज्यादा उत्सुक हो जाते हैं कि यह जमीन आखिरकार है किसकी और उसके बाद से तो फिर कोर्ट में एक के बाद एक के बाद एक अपील से अपील होते जाती हैं।

नवंबर 1989 का कांड।

द राजीव गांधी गवर्नमेंट विश्व हिंदू परिषद को अनुमति दे देती है कि वह लोग बाबरी मस्जिद के अंदर राम जी की पूजा कर सकते हैं। और उसके बाद से फिर वहां पूजा पाठ शुरू हो जाती है।

सितंबर 1990 का कांड।

सितंबर 1990 को एलके आडवाणी ने रथयात्रा निकाली जिसका समय 25 सितंबर से 30 अक्टूबर तक कि का था परंतु इस यात्रा के दौरान कई विवाद और कई दंगे फसाद हुए जिसमें से 2000 लोगों की मौत हो चुकी थी। 

दिसंबर 1992 का कांड।

दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद को तोड़ा जाता है और लिब्राहन कमीशन को स्थापना किया जाता है। परंतु बाबरी मस्जिद के टूटने के बाद मुस्लिम गण में ज्यादा ही आ जाती है कि अभियान राम मंदिर तो बनेगा ही नहीं।

1993 का कांड।

1993 तक यह जमीन का विवाद 67 एकड़ तक कि की जमीन में फैल जाता है और लोगों में और ज्यादा उच्चता जाति के आखिरकार यह जमीन है किसकी?

अप्रैल 2002 का कांड।

2002 अप्रैल में यह मामला अलाहाबाद हाई कोर्ट में जाता है कि आखिर यह जमीन है किसकी इस जमीन का असली आग्रह है कौन यहां मस्जिद बनेगी या मंदिर बनेगा?

मार्च 2003

मार्च 2003 में इलाहाबाद हाई कोर्ट का यह फैसला आता है कि उस जमीन पर स्टे लग जाएगा ना कोई वहां पूजा करेगा ना कोई पार्टी और ना मस्जिद का मामला करना मंदिर का मामला।

2009 का कांड।

2009 में इब्राहिम समिति ने जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की।

30 सितंबर 2010 का कांड।

30 सितंबर 2010 में कोर्ट का यह फैसला आया कि वह विवादित जमीन को तीन हिस्सों में बांट दिया जाएगा। परंतु लोगों ने इस फैसले को मंजूरी नहीं दी और उसे रिजेक्ट कर दिया।

मई 2011 का कांड।

मई 2011 में 30 सितंबर 2010 के फैसले पर स्टे लग जाता है।

अगस्त 2017 का कांड।

अगस्त 2017 में दीपक मिश्रा के पास केस चले जाता है और फिर उस पर लगातार फैसले होते जाते हैं।

जनवरी 2019 का कांड।

जनवरी 2019 में किस रंजन गोगोई के हाथ में चले जाता है जिसे बाद जज रहते हैं और उसे लीड रंजन गोगोई साहब करते हैं और इन्हीं के द्वारा राम मंदिर का फैसला आता है।

6 अगस्त 2019 का कांड।

6 अगस्त 2019 में तीन मेडिएटर की टीम बैठा दी जाती है। पर यह लोग फैसले नहीं ले पाते फिर से यह केस कोर्ट के हाथ में चला जाता है।

16 अक्टूबर 2019 का कांड।

16 अक्टूबर 2019 के दिन रंजन गोगोई साथ 40 दिन की मोहलत मांगते हैं फैसले के लिए।

9 नवंबर 2019 को अंतिम फैसला आता है

9 नवंबर 2019 को अंतिम फैसला आता है जिसमें बताया जाता है कि बाबरी मस्जिद की जगह थी वह राम मंदिर की है और मस्जिद बनाने के लिए मुसलमानों को जगह अलग से दी जाएगी परंतु वहां के आसपास की सारी जमीन राम मंदिर बनाने के लिए प्रयोग में ली जाएगी।
और इस फैसले को सभी भक्तगण हंसते-हंसते स्वीकार कर लेते हैं और हिंदू मुस्लिम में भी कोई विवाद नहीं होता और किसी प्रकार के दंगे फसाद नहीं होते इस फैसले को सभी लोग शांतिपूर्वक अपना लेते हैं और अपने अपने जिस धर्म को आगे बढ़ाना है उस धर्म के प्रति आस्था लगाए आगे लगाते हैं और मंदिर का काम शुरु करवाते हैं।
🚩🚩🚩जय श्री राम।🚩🚩🚩

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