Tuesday, 10 December 2019

अकबर बीरबल के 3 मजेदार किस्से और कहानियां। Akbar Birbal stories in Hindi



Akbar Birbal stories in Hindi

Akbar Birbal stories in Hindi , Akbar Birbal ki kahaniyan
Akbar Birbal ki kahaniyan



सबसे बड़ा हथियार 

अकबर और बीरबल के बीच कभी - कभी ऐसी बातें भी हुआ करती थीं , जिनकी परख करने में जान का भी खतरा रहता था । एक बार अकबर ने बीरबल से पूछा , " बीरबल , संसार में सबसे बड़ा हथियार कौन - सा है ? "
" बादशाह सलामत ! संसार में सबसे बड़ा हथियार है आत्मविश्वास । " बीरबल ने जवाब दिया ।
अकबर ने बीरबल की इस बात को सुनकर अपने दिल में रख लिया और किसी समय इसकी परख करने का निश्चय किया। 
             संयोग से एक दिन एक हाथी पागल हो गया । ऐसे में हाथी को जंजीरों में जकड़ कर रखा जाने लगा ।
             अकबर ने बीरबल के आत्मविश्वासे की परख करने के लिए उधर तो बीरबल को बुलवा भेजा और इधर हाथी के महावत को हुक्म दिया कि जैसे ही बीरबल को आता देखे , वैसे ही हाथी की जंजीर खोल दे ।
                  बीरबल को इस बात का पता नहीं था । जब वे बादशाह अकबर से मिलने उनके दरबार की ओर जा रहे थे तो पागल हाथी को छोड़ा जा चुका था । बीरबल अपनी मस्ती में चले जा रहे थे कि उनकी नजर पागल हाथी पर पड़ी , जो चिंघाड़ता हआ उनकी तरफ आ रहा था । 
                  बीरबल हाजिर जवाब , बेहद बुद्धिमान , चतुर और आत्मविश्वासी थे । वे समझ गए कि बादशाह अकबर ने उनके आत्मविश्वास और बुद्धि की परीक्षा के लिए ही पागल हाथी को छुड़वाया 
                      । दौड़ता हुआ हाथी सूंड को उठाए तेजी से बीरबल की ओर चला आ रहा था । बीरबल ऐसे स्थान पर खड़े थे कि वे इधर उधर भागकर भी नहीं बच सकते थे । ठीक उसी वक्त बीरबल को एक कुत्ता दिखाई दिया । हाथी बहुत निकट आ गया था । इतना करीब कि वह बीरबल को अपनी सूंड में लपेट लेता । तभी बीरबल ने झपटकर कुत्ते की पिछली दोनों टाँगें पकड़ी और पूरी ताकत से घुमाकर हाथी पर फेंका । बुरी तरह घबराकर चीखता हुआ कुत्ता जब हाथी से जाकर टकराया तो उसकी भयानक चीखें सुनकर हाथी भी घबरा गया और पलटकर भागा । 
                      अकबर को बीरबल की इस बात की खबर मिल गई और उन्हें यह मानना पड़ा कि बीरबल ने बिल्कुल सच कहा कि आत्मविश्वास ही सबसे बड़ा हथियार है । 


Best three stories of Akbar Birbal in Hindi । Akbar Birbal ki kahaniyan



मनहूस कौन ?

                        एक दिन सुबह के समय बादशाह अकबर अपने महल के झरोखे में खड़े थे । उसी समय एक ऐसा व्यक्ति महल के नीचे रास्ते से गुजरा , जिसके बारे में कहा जाता था कि वह मनहूस है और सुबह - सुबह जो भी उसकी सूरत देख लेता है , उस दिन वह मुसीबतों से घिरा रहता है । उस व्यक्ति ने बादशाह को सलाम किया और आगे बढ़ गया । बादशाह अकबर सोचने लगे कि क्या यह बात सही है ? आज हमने इसका मुँह देख लिया है , देखते हैं , हमारे साथ क्या गुज़रती है ।
                       अभी अकबर स्नान कर दरबार में जाने के लिए तैयार हुए ही थे कि उन्हें समाचार मिला कि उनकी बेगम का भाई दुर्घटना में घायल हो गया है । दरबार में जाने के बदले वह अपने साले को देखने चले गए । लौटते वक्त महल की सीढ़ियों पर चढ़ते समय उनका पाँव फिसल गया और पैर में मोच आ गई । पैर में पट्टी बँधवाकर वे दरबार में पहुँचे । उस दिन बीरबल दरबार में नहीं आया , इसलिए कोई काम नहीं हो सका । ऊबकर वे अपने महल में लौट आए और थोड़ा आराम करने का विचार किया । अभी उन्हें जरा - सी झपकी आई थी।  कि बेगम ने उन्हें भोजन करने के लिए बुलाया । आज भोजन करने का उनका मन नहीं था । फिर भी भोजन करने बैठ गए , किन्तु अभी पहला ग्रास ही मुँह में डाला था कि अचानक कहीं से एक मक्खी उनकी थाली में आ गिरी । वे खाना छोड़ कर खड़े हो गए । अब तो उनका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया । बेगम से भी उनकी कहा - सुनी हो गई और बेगम , नाराज़ हो गईं । जैसे - तैसे वह दिन पूरा हुआ ।
                     शाम को वे महल की छत पर गए और एकान्त में बैठकर सोचने लगे कि आज मेरा पूरा दिन खराब गया । ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था । आज ही ऐसा क्यों हुआ ? यह जरूर उस मनहूस की सूरत देखने का परिणाम है । उन्होंने उसी समय सिपाहियों को हुक्म दिया कि उस मनहूस को गिरफ्तार करके हमारे सामने पेश किया जाए ।
               सिपाही फौरन उसे पकड़कर ले आए । बादशाह ने उसे फाँसी की सज़ा सुनाई । दरबारियों के पूछने पर उन्होंने पूरी बात बताई कि किस प्रकार इसका मुंह देखने पर उन्हें पूरा दिन परेशान रहना पड़ा ।
           खबर बीरबल तक भी पहुँची । उन्हें यह गरीब मार होती अच्छी नहीं लगी । वे सीधे कारागार पहुँचे और उस व्यक्ति से मिले और कुछ समझाकर लौट आए ।
            फाँसी के दिन सिपाही उसे फाँसी के तख्ते के पास ले गए । फाँसी देने के पहले कोतवाल ने उससे उसकी अन्तिम इच्छा पूछी । उसने कहा , " कल सुबह बादशाह ने मेरा मुँह देखा था , इसलिए उन्हें कुछ तकलीफें उठानी पड़ी । कल ही मैंने सबसे  पहले उनका मुँह देखा था, इसलिए मुझे आज फाँसी पर चढ़ना पड़ रहा है। कोतवाल साहब! आप दरबार में जाकर बादशाह, दरबारी और नगर की जनता को मेरा यह संदेश भेज दें कि आज ही!  से सुबह के समय कोई बादशाह का मुँह न देखे। जो भी व्यक्ति सुबह के समय बादशाह का मुँह देखगे, उसे मेरी तरह फाँसी पर चढ़ना पड़ेगा। बस, यही मेरी अंतिम इच्छा है।

              उस व्यक्ति की यह बाबा  सुनकर कोतवाल स्तब्ध रह गया।  कैदी की अंतरिम इच्छा पूरी किए बिना उसके फाँसी नहीं दी जा सकती थी।  अत: वह फौरन दरबार की ओर रवाना हो गई और बादशाह को उस व्यक्ति की अंतिम इच्छा बताई, उसकी इच्छा सुनकर वे भी स्तब्ध रह गए।  उन्होंने तुरन्त कैदी को दरबार में बुलवाया।
                     बादशाह ने उसे कहा, "मैं समझ गया, बीरबल की सलाह से ही आप इस तरह की समझदारी की बात की है। मुझे वास्तव में अन्याय होने जा रहा था। जाओ, मैं तुम्हारी सज़ाएँ करता हूँ।
            बादशाह ने उस व्यक्ति से पाँच सौ रुपये लिए।  मुहरें भी प्रस्तुत करें।  वह व्यक्ति खुश होकर चला गया।  एक निर्दोष के प्राण बचाने के लिए बादशाह ने बीरबल का बहुत आभार माना। 


                       अनोखा बुद्धिमान

एक दिन बादशाह ने बीरबल से कहा " बीरबल , कोई एक ऐसा आदमी ढूँढकर लाओ जो बुद्धिमानों से भी ज्यादा बुद्धिमान हो ।
                     जैसा हुक्म जहाँपनाह ! बहुत जल्दी ऐसा आदमी आपके सामने हाजिर कर दूंगा , पर इसके लिए समय और धन की आवश्यकता पड़ेगी ।
            पाँच सौ स्वर्ण मोहरें ले लो और तुम्हें एक सप्ताह का समय दिया जाता है ।
              
                     बीरबल समय और धन पाकर अपने घर पर आराम करने लगे । अधिकांश धन को उन्होंने दीन - दुःखियों की सहायता में लगा दिया । सातवें दिन बीरबल ने इधर - उधर घूमकर गाय भैंस चराते एक ग्वाले को पकड़ा । उसे नहला - धुलाकर अच्छे वस्त्र पहनाए । फिर सौ स्वर्ण मुद्राएँ देकर उसे राज दरबार में ले गए । साथ ही उसे रास्ते में अच्छी तरह सिखा - पढ़ा दिया कि वहाँ जाकर उसे क्या करना है

            दरबार में पहुँचकर ग्वाले ने नि : शब्द हाथ जोड़कर बादशाह को प्रणाम किया , तत्पश्चात् बीरबल ने बादशाह से कहा , " आपके आदेशानुसार मैं बुद्धिमानों से भी बुद्धिमान व्यक्ति ले आया हूँ । "
                 बादशाह ने ग्वाले से पूछा , " तुम कहाँ रहते हो ? तुम्हारा नाम क्या है ? तुम कौन - सा विशेष कार्य जानते हो ? "
                बादशाह ने उससे प्रश्न पर प्रश्न किए , परन्तु वह तो बीरबल द्वारा सिखा - पढ़ाकर लाया गया था । अतः उसने कोई उत्तर नहीं दिया ।
बादशाह सवाल करते रहे और वह व्यक्ति खामोशी से बैठा उनका चेहरा देखता रहा ।
बादशाह को लगा कि यह तो उनका अपमान है कि मैं बोलता जा रहा हूँ और ये व्यक्ति खामोश है ।
जब उसकी जब उसकी खामोशी उनसे और बरदाश्त न हुई तो झुंझला कर वे बोले , " यह तुम किस बेवकूफ को पकड़ लाए बीरबल ? यह गूंगा - बहरा तो नहीं ? मेरे किसी प्रश्न का उत्तर इसने नहीं दिया । "
तब बीरबल ने मुस्कराकर कहा , " यह इसकी बुद्धिमत्ता है अन्नदाता ! बुजुर्गों से इसने सुन रखा है कि राजा और अपने से अधिक बुद्धिमान व्यक्ति के सामने चुप रहने में ही भलाई है । इसलिए यह उन सुनी हुई बातों पर अमल कर रहा है । आपको शायद याद नहीं कि आपने मुझसे कहा था कि कोई ऐसा व्यक्ति ढूँढकर लाऊँ जो बुद्धिमानों से भी बुद्धिमान हो । यह वही आदमी है । "
बादशाह अकबर बीरबल की हाजिरजवाबी सुनकर मुस्कराए और ग्वाले को इनाम देकर विदा कर दिया ।


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