Monday, 9 December 2019

Best three stories of Akbar Birbal in Hindi । Akbar Birbal ki kahaniyan

          Akbar Birbal stories in Hindi 

Best two stories of Akbar Birbal in Hindi , Akbar Birbal ki kahaniyan
Akbar Birbal stories


हरा घोड़ा

        एक दिन बादशाह अकबर घोड़े पर बैठकर शाही बाग में घूमने गए । साथ में बीरबल भी थे । चारों ओर हरे - भरे वृक्ष और हरी - हरी घास देखकर अकबर को बहुत आनन्द आया। उन्हें लगा कि बगीचे में सैर करने के लिए तो घोड़ा भी हरे रंग का ही होना चाहिए।
उन्होंने बीरबल से कहा , " बीरबल मुझे हरे रंग का घोड़ा चाहिए । तुम मुझे सात दिन में हरे रंग का घोड़ाला दो । यदि तुम हरे रंग का घोड़ा न ला सके तो हमें अपनी शक्ल मत दिखाना । "
हरे रंग का घोड़ा तो होता ही नहीं है । अकबर और बीरबल दोनों को यह मालूम था , लेकिन अकबर को तो बीरबल की परीक्षा लेनी थी ।

दरअसल , इस प्रकार के अटपटे सवाल करके वे चाहते थे कि बीरबल अपनी हार स्वीकार कर ले और कहे कि जहाँपनाह मैं हार गया , मगर बीरबल भी अपने जैसे एक ही थे । वे उनके हर सवाल का ऐसा सटीक उत्तर देते थे कि बादशाह अकबर को मुँह की खानी पड़ती थी ।
बीरबल हरे रंग के घोड़े की खोज के बहाने सात दिन इधर - उधर घूमते रहे ।
आठवें दिन वे दरबार में हाजिर हुए और बादशाह से बोले , " जहाँपनाह ! मुझे हरे रंग का घोड़ा मिल गया है । "
बादशाह को आश्चर्य हुआ । उन्होंने कहा , " जल्दी बताओ , कहाँ है हरा घोड़ा ? "
बीरबल ने कहा , " जहाँपनाह ! घोड़ा तो आपको मिल जाएगा , मैंने बड़ी मुश्किल से उसे खोजा है , मगर उसके मालिक ने दो शर्ते रखी हैं । "
बादशाह ने कहा , " क्या शर्ते हैं ? "
" पहली शर्त तो यह है कि घोड़ा लेने के लिए आपको स्वयं जाना होगा । "
" यह तो बड़ी आसान शर्त है । दूसरी शर्त क्या है ? " "
घोड़ा खास रंग का है , इसलिए उसे लाने का दिन भी खास ही होगा । उसका मालिक कहता है कि सप्ताह के सात दिनों के अलावा किसी भी दिन आकर इसे ले जाओ । "
अकबर बीरबल का मुँह देखते रह गए ।
बीरबल ने हँसते हुए कहा , " जहाँपनाह ! हरे रंग का घोड़ा लाना हो , तो उसकी शर्ते भी माननी पड़ेंगी । "
अकबर खिलखिला कर हँस पड़े । बीरबल की चतुराई से वह खुश हुए । समझ गए कि बीरबल को मूर्ख बनाना सरल नहीं है ।

दाढ़ी पकड़ने की सजा

बादशाह अकबर एक दिन दरबार में पधारे और सिंहासन पर विराजमान होते ही उन्होंने दरबारियों से कहा , " आज एक शख्स ने मेरी दाढ़ी खींची है । कहिए , मैं उसे क्या सज़ा दूं ? "
यह सुनकर सभी दरबारी हैरान हुए और सोचने लगे कि किसने ऐसी गुस्ताख़ी की ? आखिर किसकी मौत आई है , जो ऐसी जुर्रत कर बैठा । वे परस्पर कानाफूसी करने लगे ।
थोड़ी देर बाद एक दरबारी बोला , “ जहाँपनाह ! जिसने ऐसा दुस्साहस किया है , उसका सिर धड़ से उड़ा दिया जाए । "
दूसरे दरबारी ने कहा , " मेरी राय है जहाँपनाह कि ऐसी  गुस्ताख़ी करने वाले को हाथी के पैरों तले कुचलवा दिया । जाए । "
किसी ने कहा उस पर कोड़े बरसाए जाएँ , किसी ने कहा कि उसे जिन्दा दीवार में चिनवा दिया जाए ।
जितने दरबारी , उतनी तरह की बातें ।
तरह - तरह की सजाएँ सझाई गईं ।
उनकी बातें सुनकर बादशाह ऊब गए । अन्त में उन्होंने बीरबल से कहा , " बीरबल , तुम क्या कहते हो ? हमारी दाढ़ी खींचने वाले को हमें क्या सजा देनी चाहिए ? "
बीरबल मंद - मंद मुस्कराए और बोले , " जहाँपनाह ! आप उसे प्यार से मिठाई खिलाइए । इस अपराध की यही सज़ा है । "

बीरबल का उत्तर सुनकर सारे दरबारी चौके और उस अंदाज में बीरबल का चेहरा देखने लगे , मानो वे पगला गए हों ।
जबकि बीरबल के उत्तर से खुश होकर बादशाह ने कहा , " वाह - वाह ! बीरबल , तुम्हारी बात बिल्कुल सही है । लेकिन यह तो बताओ कि मेरी दाढी किसने खींची होगी ? "
बीरबल ने कहा , " जहाँपनाह ! छोटे शहज़ादे के अलावा ऐसी हिम्मत कौन कर सकता है ? उसने तो प्यार से ही ऐसा किया होगा ! इसलिए उसे सज़ा में मिठाई खिलानी चाहिए । "
बीरबल की बात सही थी । आज सुबह शहज़ादा बादशाह की गोद में बैठा था । खेलते - खेलते उसने बादशाह की दाढ़ी खींची थी । चतुर बीरबल के जवाब से बादशाह खुश हुए ।
अन्य सभी दरबारियों के सिर शर्म से झुक गए , जो इतना भी नहीं सोच पाए कि बाहर का कोई शख्स भला बादशाह की दाढ़ी कैसे खींच सकता है ।




                   खाने के बाद लेटना

किसी समय बीरबल ने अकबर को यह कहावत सुनाई थी कि ' खाकर लेट जा और मारकर भाग जा ' - यह सयाने लोगों की पहचान है । जो लोग ऐसा करते हैं , ज़िन्दगी में उन्हें किसी भी प्रकार का दुःख नहीं उठाना पड़ता।
एक दिन अकबर को अचानक ही बीरबल की यह कहावत याद आ गई ।
दोपहर का समय था । उन्होंने सोचा , बीरबल अवश्य ही खाना खाने के बाद लेटता होगा । आज हम उसकी इस बात को गलत सिद्ध कर देंगे । उन्होंने एक नौकर को अपने पास बुलाकर पूरी बात समझाई और बीरबल के पास भेज दिया । नौकर ने अकबर का आदेश बीरबल को सुना दिया ।
बीरबल बुद्धिमान तो थे ही ,उन्होंने समझ लिया कि बादशाह ने उसे क्यों तुरंत आने के लिए कहा है । इसलिए बीरबल ने भोजन करके नौकर से कहा , " ठहरो , मैं कपड़े बदलकर तुम्हारे साथ ही चल रहा हूँ।
उस दिन बीरबल ने पहनने के लिए चुस्त पाजामा चुना । पाजामे को पहनने के लिए वह कुछ देर के लिए बिस्तर पर लेट गए । पाजामा पहनने के बहाने वे काफी देर बिस्तर पर लेटे रहे । फिर नौकर के साथ चल दिए ।
जब बीरबल दरबार में पहुँचे तो अकबर ने कहा , " कहो बीरबल , खाना खाने के बाद आज भी लेटे या नहीं ? "
" बिल्कुल लेटा था जहाँपनाह । "

बीरबल की बात सुनकर अकबर ने क्रोधित स्वर में कहा , " इसका मतलब , तुमने हमारे हुक्म की अवहेलना की है । हम तुम्हें हुक्म उदूली करने की सज़ा देंगे । जब हमने खाना खाकर तुरन्त बुलाया था , तो फिर तुम लेटे क्यों ? "
" बादशाह सलामत ! मैंने आपके हुक्म की अवहेलना कहाँ की है ? मैं तो खाना खाने के बाद कपड़े पहनकर सीधा आपके पास ही आ रहा हूँ । आप चाहें तो पैगाम ले जाने वाले से पूछ सकते हैं । अब ये अलग बात है कि ये चुस्त पाजामा पहनने के लिए ही मुझे लेटना पड़ा था । " बीरबल ने सहज भाव से उत्तर दिया ।
अकबर बादशाह बीरबल की चतुरता को समझ गए और मुस्कुरा पड़े ।

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