Saturday, 21 December 2019

Best #5 moral stories in Hindi for kids best of 2020

Best #5 moral stories in Hindi for kids best of 2020


Best #5 moral stories in Hindi for kids best of 2020, moral stories for kids

अकबर का गुस्सा

Best #5 moral stories in Hindi for kids best of 2020, moral stories for kidsएक दिन अकबर दरबार में आए , तो बहुत गुस्से में थे । कोई कुछ भी पूछता तो भी वह गुस्से में ही उत्तर देते । दरबारी समझ गए आज बादशाह का मिजाज ठीक नहीं है ।
दरबार समाप्त होने पर बीरबल ने अकबर से उनके गुस्से का कारण पूछा । अकबर ने कहा , " अरे , छोड़ो इस बात को मेरा दामाद बड़ा पाजी है । मैं गुस्सा न करूँ तो क्या करूँ ? हमेशा उल्टी - सीधी हरकतें करता रहता है । "
“ अब देखो न अपनी बेटी से मिले हुए एक वर्ष हो गया है । फिर भी मेरा दामाद उसे नहीं भेजता । " अकबर ने गुस्से में कहा ।
" जहाँपनाह ! इसमें इतना नाराज़ होने वाली क्या बात है ? मैं आज ही बेटी को लाने के लिए आदमी भेज देता हूँ । "
" आदमी तो मैंने भेजा ही था , पर दामाद मानता ही नहीं । वास्तव में ये दामाद जाति होती ही बहुत खराब है । अब तुम एक काम करो । मैदान में कुछ शूलियाँ तैयार करवाओ । हम अपने राज्य के सभी दामादों को शूली पर चढ़ा देंगे । "
बीरबल ने बादशाह अकबर को बहुत समझाया , फिर भी उनका गुस्सा शान्त नहीं हुआ । वह कोई बात सुनने को तैयार नहीं थे । आखिरकार बीरबल ने एक मैदान में कुछ शूलियाँ तैयार करा दी ।
जब बीरबल अकबर को मैदान में शूलियाँ दिखाने ले गए , तो शूलियाँ देखकर बादशाह को तसल्ली हो गई । वह बोले , " ठीक है , अब मैं राज्य से दामादों का नामोनिशान मिटा दूंगा । "
इतने में एक सोने और एक चाँदी की शूली पर अकबर की नजर पड़ी तो वे चौंके । उन्होंने बीरबल से पूछा , " अरे बीरबल , तुमने ये दो कीमती शूलियाँ किसके लिए बनवाई ।
बीरबल ने सिर झुकाकर कहा , " हुजूर ! सोने की शूली आपके लिए और चाँदी की मेरे लिए । "
बादशाह अकबर सोच में पड़ गए । उन्होंने बीरबल से कहा , " मैंने तुम्हें ऐसा करने के लिए कब कहा था ? हम दोनों को शूलियों पर थोड़े ही चढ़ना है ? "
" जहाँपनाह ! आपने राज्य के सभी दामादों को शूली पर चढ़ाने के लिए कहा था । आप और मैं भी तो किसी के दामाद हैं । यदि सभी दामाद शूलियों पर चढ़ाए जाएँगे , तो हम भी कहाँ बच पाएँगे । आप बादशाह हैं , इसलिए आपके लिए सोने की शली बनवाई है और मैं आपका खास खिदमदगार हूँ , इसलिए अपने लिए चाँदी की शूली बनवाई है । देखिये , दोनों शूलियाँ कितनी अच्छी बनी हैं । "
बीरबल की बात सुनकर बादशाह अकबर सन्न रह गए । उन्हें अपनी भूल समझ में आ गई । उन्होंने फौरन राज्य के दामादों को शूलियों पर चढ़ाने का आदेश रद्द कर दिया ।
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भक्तों के कृष्ण

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एक दिन बादशाह अकबर ने बीरबल से पूछा , " तुम्हारे धर्म ग्रन्थों में यह लिखा है कि हाथी की गुहार सुनकर श्री कृष्णजी पैदल दौड़े थे । न तो उन्होंने किसी सेवक को ही साथ लिया , न सवारी पर ही गए । इसकी वजह समझ में नहीं आती । क्या उनके यहाँ सेवक नहीं थे ? "
बीरबल बोले , " इसका उत्तर आपको समय आने पर ही दिया जा सकेगा जहाँपनाह । "
  कुछ दिन बीतने पर एक दिन बीरबल ने एक नौकर को , जो शहज़ादे को इधर - उधर टहलाता था , एक मोम की बनी हुई मूर्ति दी , जो कि हू - ब - हू बादशाह के पोते की तरह थी ।
मूर्ति यथोचित गहने - कपड़ों से सुसज्जित होने के कारण दूर से देखने में बिल्कुल शहज़ादा मालूम होती थी । बीरबल ने नौकर को अच्छी तरह समझा दिया कि उसे क्या करना है । "
जिस तरह तुम नित्य - प्रति बादशाह के पोते को लेकर उनके सम्मुख जाते हो , ठीक उसी तरह आज मूर्ति को लेकर जाना और बाग में जलाशय के पास फिसल जाने का बहाना कर गिर पड़ना । तुम सावधानी से जमीन पर गिरना , लेकिन मर्ति पानी में अवश्य गिरनी चाहिए । यदि तुम्हें इस कार्य । सफलता मिली तो तुम्हें इनाम दिया जाएगा । "
उस दिन बादशाह बाग में बैठे थे । वहीं एक जलाशय था । नौकर शाहजादे को खिला रहा था कि अचानक उसका पाल फिसला और उसके हाथ से शहज़ादा छिटककर पानी में जा मिरा । बादशाह यह देखकर बुरी तरह घबरा गए और उठकर । जलाशय की तरफ लपके ।
कुछ देर बाद मोम की मूर्ति को लिए पानी से बाहर निकले ।
बीरबल भी उस वक्त वहाँ उपस्थित थे , बोले , " जहाँपनाह !
आपके पास सेवकों और कनीज़ों की फौज है , फिर आप स्वयं और वह भी नंगे पाँव अपने पोते के लिए क्यों दौड़ पड़े ? आखिर सेवक सेविकाएँ किस काम आएँगी ? "
बादशाह बीरबल का चेहरा देखने लगे । वे समझ नहीं पा रहे थे कि बीरबल कहना क्या चाहते हैं ।
बीरबल ने कुछ देर रुककर फिर कहा , " अब भी आप नहीं समझे तो सुनिए , जैसे आपको अपना पोता प्यारा है , उसी तरह श्री कृष्णजी को अपने भक्त प्यारे हैं । इसलिए उनकी पुकार पर ही वे दौड़े चले गए थे । "
यह सनकर बादशाह को अपनी भूल का अहसास हुआ ।

खिज़ाब लगाने वाले


Best #5 moral stories in Hindi for kids best of 2020, moral stories for kids वृद्धावस्था में अकबर खिज़ाब लगाया करते थे । एक बार खिजाब लगाने के दौरान उन्होंने बीरबल से पूछा , " बीरबल ! खिज़ाब दिमाग को नुकसान तो नहीं पहुँचाता ? "

 बीरबल चुप रहे । क्या जवाब देते । जो जवाब देते , वह बादशाह को पसंद न आता , इसलिए वे चुप ही रहे ।

बादशाह अकबर ने सोचा कि शायद बीरबल के पास इस सवाल का जवाब नहीं है और इस सवाल को लेकर बीरबल का मजाक बनाया जा सकता है ।

 अत : उन्होंने फिर पूछा , " बताओ ना खिज़ाब लगाने से दिमाग को नुकसान तो नहीं पहुँचता ? "

अब बीरबल से न रहा गया । तपाक से बोले , " हुजूर ! ,खिज़ाब लगाने वालों के दिमाग ही नहीं होता । यदि होता तो क्यों बनावटी सुन्दरता लादकर बूढ़े से जवान बनते । "

यह उत्तर पाकर अकबर बादशाह चुप हो गए । बीरबल ने अपने जवाब में उनकी ओर संकेत कर दिया था कि उनमें दिमाग नहीं है । मगर उनका उत्तर था बिल्कुल ठीक ।

 अकबर ने उस दिन से खिज़ाब लगाना ही छोड़ दिया ।

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तीन मूर्तियाँ

Best #5 moral stories in Hindi for kids best of 2020, moral stories for kidsएक बुजुर्ग शिल्पी ने तीन मूर्तियाँ बनाई थीं । तीनो मूर्तियाँ देखने में एक जैसी ही थीं । पर मूर्तियों की आंतरिक रचना में फर्क था । शिल्पी इन तीनों मूर्तियों को लेकर बादशाह अकबर के दरबार में आया और बताया , " हुजूर , ये तीनों मूर्तियाँ देखने में तो एक जैसी हैं , लेकिन इनमें से एक मूर्ति । शेष दो से श्रेष्ठ है । आप बीरबल से कहिए कि वह श्रेष्ठ मूर्ति की पहचान करें । मुझे खशी होगी । "
बादशाह ने बीरबल की तरफ देखा तो बीरबल उठे और तीनों मूर्तियों को अपने हाथ में लिया । उलट - पलट कर बहुत देर तक ध्यान से देखते रहे । उन्हें मूर्तियों के कान और मुँह में बारीक - बारीक छेद दिखाई दिए ।
बीरबल ने एक लम्बा और पतला तार मँगाया । उन्होंने एक मूर्ति के कान में तार डाला । वह तार उस मूर्ति के मुँह में से बाहर आ गया । अब उन्होंने दूसरी मूर्ति के कान में तार डाला । वह उसके दूसरे कान से बाहर आ गया । बीरबल ने तीसरी मूर्ति के कान में तार डाला । वह तार सीधा मूर्ति के पेट में उतर गया ।
बीरबल ने इस मूर्ति को उठाकर कहा , " तीनों में यह मूर्ति श्रेष्ठ है । "
शिल्पी ने पूछा , " इसका कारण बताइए ? "
बीरबल बोले , " कल्पना करो कि मूर्ति राजा का मंत्री है और तार राज्य की गुप्त बात । पहली मूर्ति के कान में डाला हुआ तार उसके मुंह से बाहर आया , इसका मतलब यह हुआ कि यह मंत्री राज्य की गुप्त बात कहीं भी कह सकता है । जो मंत्री राज्य की गुप्त बात को किसी के भी सामने बोल देता है , वह मंत्री विश्वास योग्य नहीं । दूसरी मूर्ति के एक कान में डाला हुआ तार दूसरे कान से बाहर आ गया । बात चाहे कितनी ही महत्वपूर्ण हो , जो मंत्री उस पर ध्यान नहीं देता और उसे एक कान से सुनकर दूसरे कान से बाहर निकाल देता है वह भी योग्य नहीं है । ऐसा लापरवाह मंत्री राज्य के लिए खतरा खड़ा करवा सकता है । तीसरी मूर्ति के कान में डाला हुआ तार सीधे उसके पेट में उतर गया । जो मंत्री राज्य की गुप्त बात सुनकर उसे अपने पेट में रखता है , किसी से कहता नहीं , वही मंत्री श्रेष्ठ माना जाएगा । इसलिए यही मूर्ति श्रेष्ठ है । "
शिल्पी बीरबल का खुलासा सुनकर आश्चर्यचकित हो गया । उसने बीरबल को गले लगा लिया और तीनों मूर्तियाँ बीरबल को उपहार में दे दी ।
बीरबल का फैसला सुनकर बादशाह अकबर भी वाह वाह कर उठे ।


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शेर का दूध


Best #5 moral stories in Hindi for kids best of 2020, moral stories for kidsबादशाह अकबर का साला मुल्ला दो प्याजा बीरबल का कट्टर दुश्मन था । वह हमेशा बीरबल के खिलाफ षड्यंत्र रचता रहता था । एक बार उसने अपनी बहन बेगम साहिबा ' को अपने साथ मिलाकर एक योजना बनाई ।
योजना के अनुसार बेगम एक दिन बीमार पड़ गई । फौरन शाही हकीम को बुलाया गया , जिसने बेगम को देखकर कहा कि बेगम तभी ठीक हो सकती हैं , जब उन्हें शेर का दूध पिलाया जाए ।
बादशाह ने यह बात अपने सभासदों के बीच रखी । अधिकांश सभासद तो थे ही बीरबल के खिलाफ । अतः सभी ने मुल्ला दो प्याजा की शह पाकर एक स्वर में कहा , " बादशाह सलामत , शेर का दूध बीरबल लेकर आएँगे , क्योंकि वे बुद्धिमान और साहसी हैं । "
बादशाह ने बीरबल की तरफ देखा , " क्यों बीरबल ! क्या तुमला सकते हो शेर का द्रध ? "
बीरबल समझ गए कि यह उनके दुश्मनों की चाल है और लगता है कि हकीम और बेगम साहिबा भी उनसे मिल चुके ।
वे अपने स्थान से उठे और बादशाह के आगे सिर झुकाकर बोले , " मैं पूरी कोशिश करूँगा जहाँपनाह ।
" और फिर वे कुछ दिन का अवकाश लेकर चले गए
घर जाकर उन्होंने यह बात अपनी बेटी को बताई । बीरबल की बेटी भी बहुत होशियार थी । वह बोली , " पिताजी ! इस बात के लिए आपको चिन्ता करने की कोई आवश्यकता नहीं है । इसका हल मैं आपको बता दूंगी । छुट्टियाँ समाप्त होने के बाद भी आप दरबार में न जाएँ । " यह कहकर बीरबल की बेटी ने युक्ति समझाई ।
बीरबल की छुट्टियाँ समाप्त हो जाने पर बादशाह का दूत उन्हें बुलाने आया तो बीरबल की लड़की ने कह दिया कि उनको बच्चा हुआ है । वे प्रसूति गृह में हैं । अभी नहीं आ सकते ।
दूत ने दरबार में जाकर वैसा ही कह दिया ।
तब अकबर बादशाह और उनके सदस्यों को अपनी चक का अहसास हुआ कि दूध शेर नहीं शेरनी देती है ।
अकबर ने बीरबल को वापस सभा में बुलवा लिया ।

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