Sunday, 8 December 2019

Best stories of Akbar Birbal in Hindi | Akbar Birbal stories in Hindi

Best stories of Akbar Birbal in Hindi

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Akbar Birbal stories

जल्दी बुलाकर लाओ

बादशाह अकबर एक सुबह उठते ही अपनी दाढ़ी खुजलाते हुए बोले , " अरे , कोई है ? "
तुरन्त एक सेवक हाजिर हुआ ।
उसे देखते ही बादशाह बोले , " जाओ , जल्दी बुलाकर लाओ , फौरन हाजिर करो । "
सेवक की समझ में कुछ नहीं आया कि किसे बुलाकर लाए , किसे हाजिर करे ? बादशाह से पलटकर सवाल करने की तो उसकी हिम्मत ही नहीं थी ।
उस सेवक ने यह बात दूसरे सेवक को बताई । दूसरे ने तीसरे को और तीसरे ने चौथे को । इस तरह सभी सेवक यह बात जान गए और सभी उलझन में पड़ गए कि किसे बुलाकर लाएँ , किसे हाजिर करें ।
बीरबल सुबह घूमने निकले थे । उन्होंने बादशाह के निजी सेवकों को भाग - दौड़ करते देखा तो समझ गए कि जरूर बादशाह ने कोई अनोखा काम बता दिया होगा , जो इनकी समझ से बाहर है । उन्होंने एक सेवक को बुलाकर पूछा , " क्या बात है ? यह भाग - दौड़ किसलिए हो रही है ? "

सेवक ने बीरबल को सारी बात बताई , " बीरबलजी ! हमारी रक्षा करें । हम समझ नहीं पा रहे हैं कि किसे बुलाना है । अगर जल्दी बुलाकर नहीं ले गए , तो हम पर आफत आ जाएगी । "
बीरबल ने पूछा , " यह बताओ कि हुक्म देते समय बादशाह क्या कर रहे थे ? "
बादशाह का निजी सेवक , जिसे हुक्म मिला था , उसे बीरबल के सामने हाजिर किया तो उसने बताया , " जिस समय मुझे तलब किया , उस समय तो बिस्तर पर बैठे अपनी दाढ़ी खुजला रहे थे । "
बीरबल तुरन्त सारी बात समझ गए और उनके होंठों पर मुस्कान उभर आई । फिर उन्होंने उस सेवक से कहा , " तुम हज्जाम को ले जाओ । "
सेवक हज्जाम को बुला लाया और उसे बादशाह के सामने हाजिर कर दिया ।
बादशाह सोचने लगे , " मैंने इसे यह तो बताया ही नहीं था कि किसे बुलाकर लाना है । फिर यह हज्जाम को लेकर कैसे हाजिर हो गया ? "
बादशाह ने सेवक से पूछा , " सच बताओ । हज्जाम को तुम अपने मन से लाए हो या किसी ने उसे ले आने का सुझाव दिया था ? "
सेवक घबरा गया , लेकिन बताए बिना भी तो छुटकारा नहीं था । बोला , " बीरबल ने सुझाव दिया था , जहाँपनाह ! "
बादशाह बीरबल की बुद्धि पर खुश हो गए 


सबसे बड़ी चीज
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एक दिन बीरबल दरबार में उपस्थित नहीं थे । ऐसे में बीरबल से जलने वाले सभी सभासद बीरबल के खिलाफ अकबर के कान भर रहे थे ।
अकसर ऐसा ही होता था , जब भी बीरबल दरबार में उपस्थित नहीं होते थे , दरबारियों को मौका मिल जाता था । आज भी ऐसा ही अवसर था ।
बादशाह के साले मल्ला दो प्याजा की शह पाए कुछ सभासदों ने कहा , " जहाँपनाह ! आप वास्तव में बीरबल को आवश्यकता से अधिक मान देते हैं , हम लोगों से ज्यादा उन्हें चाहते हैं । आपने उन्हें बहुत सिर चढ़ा रखा है । जबकि जो काम वे करते हैं , वह काम हम भी कर सकते हैं । मगर आप हमें मौका ही नहीं देते । "
बादशाह को बीरबल की बुराई अच्छी नहीं लगती थी , उन्होंने उन चारों की परीक्षा लेने हेतु कहा , " देखो , आज बीरबल तो यहाँ हैं नहीं और मुझे अपने एक सवाल का जवाब चाहिए । यदि तुम लोगों ने मेरे प्रश्न का सही - सही जवाब नहीं दिया तो मैं तुम चारों को फाँसी पर चढ़वा दूंगा । "
बादशाह की बात सुनकर वे चारों घबरा गए । ।
उनमें से एक ने हिम्मत करके कहा , " प्रश्न बताइए बादशाह सलामत ? "
" संसार में सबसे बड़ी चीज़ क्या है ? और अच्छी तरह सोच - समझकर जवाब देना , वरना मैं कह चुका हूँ कि तुम लोगों को फाँसी पर चढ़वा दिया जाएगा । " बादशाह अकबर ने कहा , " अटपटे जवाब हरगिज नहीं चलेंगे । जवाब एक हो और बिल्कुल सही हो । "
" बादशाह सलामत ! हमें कुछ दिनों की मोहलत दी जाए । " उन्होंने सलाह करके कहा ।
" ठीक है , तुम लोगों को एक सप्ताह का समय देता हूँ । " बादशाह ने कहा ।
चारों दरबारी चले गए और दरबार से बाहर आकर सोचने लगे कि सबसे बड़ी चीज क्या हो सकती है ?
एक दरबारी बोला , " मेरी राय में तो अल्लाह से बड़ा कोई नहीं । "
" अल्लाह कोई चीज़ नहीं है । कोई दूसरा उत्तर सोचो
। " दूसरा बोला । " सबसे बड़ी चीज़ है भूख , जो आदमी से कुछ भी करवा देती है ।
" तीसरे ने कहा । " नहीं . . . नहीं , भूख भी बरदाश्त की जा सकती है । " " फिर क्या है सबसे बड़ी चीज़ ?
" छः दिन बीत गए , लेकिन उन्हें कोई उत्तर नहीं सूझा । हार कर वे चारों बीरबल के पास पहुंचे और उसे पूरी घटना कह सुनाई , साथ ही हाथ जोड़कर विनती की कि प्रश्न का उत्तर बता दें ।
- बीरबल ने मुस्कराकर कहा , " मैं तुम्हारे प्रश्न का उत्तर दूंगा , लेकिन मेरी एक शर्त है । "
" हमें आपकी हजार शर्ते मंजूर हैं । " चारों ने एक स्वर में कहा , " बस आप हमें प्रश्न का उत्तर बताकर हमारी जान बख्शी करवाएँ । बताइए आपकी क्या शर्त है ?
" " तुम में से दो अपने कन्धे पर मेरी चारपाई रखकर दरबार तक ले चलोगे । एक मेरा हुक्का पकड़ेगा , एक मेरे जूते लेकर चलेगा । " बीरबल ने अपनी शर्त बताते हुए कहा।
यह सुनते ही चारों सन्नाटे में आ गए । उन्हें लगा बीरबल ने उनके गाल पर कसकर तमाचा मार दिया हो । मगर वे कुछ बोले नहीं । अगर मौत का खौफ़ न होता तो वे बीरबल को मुँहतोड़ जवाब देते , मगर इस समय मजबूर थे , अतः तुरन्त राजी हो गए ।
दो ने अपने कन्धों पर बीरबल की चारपाई उठाई , तीसरे ने उनका हुक्का और चौथा जूते लेकर चल दिया । रास्ते में लोग आश्चर्य से उन्हें देख रहे थे । दरबार में बादशाह ने भी वह मंजर देखा और मौजूद दरबारियों ने भी । कोई कुछ न समझ सका । तभी बीरबल बोले , " महाराज ! दुनिया में सबसे बड़ी चीज़ है गरज । अपनी गरज से ये पालकी यहाँ तक उठाकर लाए हैं । "
बादशाह मुस्कराकर रह गए । वे चारों सिर झुकाकर एक ओर खड़े हो गए । 

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