Wednesday, 18 December 2019

Best #3 moral stories in Hindi of Akbar Birba । the super stories of Akbar Birbal with moral in Hindi

 Best moral stories in Hindi of Akbar Birbal

Best moral stories, best stories of Akbar Birbal in Hindi
Akbar Birbal moral stories


दोस्ती में दरार

अकबर बादशाह के एक शहज़ादे की शहर के एक प्रतिष्ठित साहूकार के लड़के से घनिष्ठ मित्रता थी । वह सारा दिन अपने मित्र के साथ सैर - सपाटा किया करता था । दोनों कोई काम - धाम नहीं करते थे । इसीलिए अकबर बादशाह तथा साहूकार को यह मित्रता पसंद नहीं थी । दोनों ही चाहते थे कि इनकी मित्रता टूट जाए ताकि दोनों ही किसी काम - धंधे में ध्यान लगाएँ ।

इन दोनों की मित्रता कैसे भंग हो , इस विषय पर एक दिन बादशाह विचार कर रहे थे , तभी बीरबल वहाँ पहुँच गए । उन्हें देख अकबर बहुत खुश हुए और पास बैठाकर बोले , " साहूकार के पुत्र तथा शहज़ादे की दोस्ती किसी न किसी तरह से छुड़ानी चाहिए । मेरे विचार से तुम ही इस काम को कर सकते हो । "
महाराज की समस्या की गंभीरता को समझकर बीरबल बोले , “ जहाँपनाह ! हुक्म जारी कीजिए कि आज शहज़ादा तथा साहूकार - पुत्र दोनों एक साथ दरबार में उपस्थित हों । "
अकबर बादशाह ने ऐसा हुक्म जारी कर दिया । दोनों मित्र नियत समय पर दरबार में उपस्थित हुए । कुछ देर तक तो इधर - उधर मन बहलाव की बातें होती रहीं । जब बीरबल ने देखा कि अब शहजादे का मन यहाँ नहीं लग रहा है , तो उन्होंने उसके साहूकार मित्र के पास जाकर उसके कान में फुसफुसा कर कुछ कहा । बात साफ नहीं थी , अतः साहूकार का लड़का कुछ नहीं समझ पाया । इसके पश्चात् बीरबल ने शहज़ादे के मित्र को संबोधित करके चेतावनी दी , " ध्यान रहे , यह बात बिल्कुल गुप्त रखी जाए । अपने इष्ट - मित्रों से भी तुम इसकी चर्चा मत करना । "

बीरबल की इस चेतावनी को सभी उपस्थित लोगों ने सुना । इसके बाद दरबार दूसरे दिन के लिए उठ गया । दरबार से बाहर निकलने के पश्चात शहज़ादे ने मित्र से पूछा , " बीरबल ने तुम्हारे कान में क्या कहा था ? "
साहूकार - पुत्र शहज़ादे को कुछ नहीं बता सका । आखिर , कोई बात बीरबल कहते या वह समझता तो बताता भी । इससे शहज़ादे को कुछ शंका उत्पन्न हुई । वह बोला , " मित्र , आज तुमने यह नया तरीका खूब अपनाया है । "
" नहीं दोस्त , बिल्कुल नहीं । बीरबल ने मुझसे कुछ कहा ही नहीं , केवल कान के पास मुँह ले जाकर कुछ अस्पष्ट - सा फुसफुसाया और खुलेआम यह कहा कि जो बात मैंने तुमसे कही है , इस बात को गुप्त रखना । " साहूकार मित्र ने शहज़ादे , को समझाते हुए कहा।
लेकिन शहज़ादे को उसकी बात पर विश्वास नहीं हुआ । उसने सोचा , उसका मित्र सब कुछ जानते हुए भी बता नहीं रहा है । शहज़ादे के दिल में संशय पैदा हो गया । धीरे - धीरे दोनों के दिलों में एक - दूसरे के प्रति अविश्वास का गहरा परदा खिंच गया । दोनों की घनिष्ठ मित्रता आखिर भंग हो गई । फिर हमेशा के लिए दोनों मित्रों का मन एक - दूसरे से हट गया । वे अपने - अपने काम - काज देखने लगे । साहूकार को भी बड़ी खुशी हुई । अकबर बादशाह बीरबल की चतुराई से अत्यधिक प्रसन्न हुए और सदा की तरह बीरबल को इस कार्य के लिए भी पुरस्कृत किया ।


Other related stories👇👇👇
How To Make Christmas। Christmas day 2019

अकबर बीरबल के 3 मजेदार किस्से और कहानियां। Akbar Birbal stories in Hindi

Best three stories of Akbar Birbal in Hindi । Akbar Birbal ki kahaniyan



 तोते की समाधि

Akbar Birbal ki kahaniyan, Akbar Birbal stories in Hindi
Akbar Birbal kahaniyan
एक बार बादशाह अकबर ने एक तोता खरीदा । तोता बड़ा ज्ञानी था । बड़ी अच्छी - अच्छी बातें करता था । बादशाह ने उसकी देखभाल के लिए एक आदमी नियुक्त कर दिया और उसे सख्त हिदायत दी कि अगर तुम्हारी लापरवाही से तोता मर गया और यह खबर तुम मेरे पास लेकर आए तो तुम्हें फाँसी पर चढ़ा दिया जाएगा ।

नौकर तन - मन से तोते की सेवा करने लगा । मगर इसे वक्त की मार ही कहेंगे कि इतनी अच्छी देखभाल के बाद भी तोता मर गया । अब तोते का रखवाला बड़ा घबराया । उसके पसीने छूटने लगे । वह जानता था कि इधर उसने बादशाह अकबर को जाकर तोते के मरने की खबर सुनाई , उधर बादशाह ने उसकी फाँसी का हुक्म जारी किया ।
सुबह से दोपहर हो गई । वह रोता रहा और अपनी किस्मत कोसता रहा । अचानक उसे बीरबल का ख्याल आया तो वह उछलकर खड़ा हो गया और कुछ ही पलों बाद बीरबल के पास जा पहुँचा । उसने जाते ही बीरबल के पाँव पकड़े और बोला , " रक्षा ! हुजूर रक्षा ।
" " अरे . . . रे . . . कौन हो तुम , उठो । बताओ क्या बात है ?
" तोते के रखवाले ने उसे बताया कि क्या बात थी ।

पूरी बात सुनकर बीरबल गम्भीर हो गए । फिर उन्होंने रखवाले को एक युक्ति बताकर विदा कर दिया और स्वयं भी राजदरबार के लिए चल दिए ।
कुछ समय बाद रखवाला दरबार में हाजिर हुआ और बोला , " महाराज ! जल्दी चलिए । "
" क्या बात है ? तोता तो ठीक है न ? "
" हाँ महाराज ! ठीक तो है , किन्तु अजीब सी हालत में उसने समाधि ले ली है । " रखवाला बोला , " न कुछ बोल रहा है , न खा रहा है , न पी रहा है , न हिल रहा है , नडुल रहा है । अब आप ही चल कर देखिए।"
महाराज बीरबल के साथ वहाँ पहुँचे और तोते की हालत देखकर बोले , " अरे मूर्ख ! सीधी तरह क्यों नहीं बताया कि तोता मर गया ! "
" यह ऐसा कैसे कह सकता था जहाँपनाह । इसने फाँसी पर थोड़े ही लटकना था । "
" ओह ! " महाराज ने कहा , " तो यह कारस्तानी तुम्हारी है । सच बीरबल ! तुमने आज एक गरीब की जान और बचा ली । "
बीरबल मुस्कराकर रह गए ।



बात कहने का ढंग

एक रात बादशाह अकबर को सपना आया कि उनके सारे दाँत गिर गए हैं और मुँह में केवल एक दाँत बचा है । सुबह होते ही अकबर ने एक प्रसिद्ध ज्योतिषी को महल में बुलाया और उससे सपने का अर्थ पूछा ।
    
कई ग्रन्थों का अध्ययन करने के बाद ज्योतिषी गम्भीर हो गया और बोला , " बादशाह सलामत ! आपका सपना अच्छा नहीं है ।

सपने का जो भी अर्थ है , साफ - साफ कहो । याद रहे , कोई बात छिपाना नहीं है । ' बादशाह ने अपना मन कड़ा करके कहा ।
ज्योतिषी ने कहा , " आपके सभी दाँत गिर जाने का मतलब है कि आपके सभी सगे - सम्बंधी आपकी आँखों के सामने एक - एक कर मर जाएँगे । आपका एक दाँत रह गया , मतलब यह कि अंत में आप अकेले ही रह जाएँगे ।
" ज्योतिषी की बात सुनकर अकबर को बहुत गुस्सा आया । उन्होंने तुरन्त ज्योतिषी को महल से बाहर निकलवा दिया और आज्ञा दी कि कोई दूसरा ज्योतिषी दरबार में आकर उनके सपने का अर्थ बताए ।

कुछ घंटों बाद ही एक दूसरा ज्योतिषी आया ।
वह बीरबल का भेजा हुआ था ।
बीरबल ने उसे समझा दिया था कि वह अपनी बात किस ढंग से कहे । उसने बादशाह से उनका सपना पूछा ।
अकबर ने उसे अपना सपना सुना दिया ।
ज्योतिषी थोड़ी देर तक तो पोथे - पत्री पलटता रहा , फिर काफी देर तक सोचकर बोला , “ आपका सपना तो बहुत अच्छा है महाराज । आपके सभी सगे - सम्बंधियों की अपेक्षा आपकी उम्र लम्बी है । बहुत समय तक आप सुख सेशन करेंगे और आपके राज्य में प्रजा बहुत सुखी रहेगी ।
" यह सुनकर अकबर खुश हुआ । उसने ज्योतिषी कोही सारा इनाम दिया । ज्योतिषी आशीर्वाद देकर अपने घर लौ आया ।
बीरबल की सलाह से एक ही बात को दूसरे ढंग से कहने पर ज्योतिषी को काफी लाभ हुआ । दरअसल , किसी को भी कड़वी परन्तु सच्ची बात सुननी अच्छी नहीं लगती , किन्तु समझदार आदमी वही होता है , जो सच्ची बात कह भी देता है और सुनने वाले को बुरा भी नहीं लगता ।

No comments:

Post a Comment