Saturday, 4 January 2020

Best 3 moral stories in hindi for kids। बच्चो के लिए 3 नैतिक कहानियाँ।


Best moral stories in hindi

चतुर खरगोश

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Moral stories

       एक जंगल में शेर और अन्य प्राणियों के बीच समझौता हुआ था । शेर के भोजन के लिए रोज एक प्राणी को उसकी गुफा में जाना पड़ता था । एक दिन एक खरगोश की बारी आई । उसे शेर के भोजन के समय तक उसकी गुफा में पहुंचना था । खरगोश बहुत चतुर था । उसने दुष्ट शेर को खत्म करने की योजना बनाई ।


        खरगोश जानबूझकर बहुत देर से शेर के पास पहुँचा । अब तक शेर के भोजन का समय बीत चुका था । उसे बहुत जोर की भूख लगी थी । इसलिए खरगोश पर उसे बहुत गुस्सा आया ।

  " तुमने आने में इतनी देर क्यो कर दी ? " शेर ने गरजते हुए पूछा । "
महराज , क्या करूँ ? " खरगोश ने बहुत ही नम्रतापूर्वक जवाब दिया ,
" रास्ते में एक दूसरा शेर मिल गया था । वह मेरा पीछा करने लगा । बहुत मुश्किल से मैं उससे पिड छुड़ाकर यहाँ आ पाया हूँ । "
" दूसरा शेर ? और वह भी इस जंगल में ? शेर ने गरजते हुए पूछा । "
हाँ महाराज , दूसरा शेर ! वह कहाँ रहता है , यह मुझे मालूम है । आप मेरे साथ चलिए । मैं आपको अभी दिखता हूँ । " खरगोश ने कहा । शेर खरगोश के साथ तुरंत ही चल पड़ा । खरगोश उसे एक कुएँ के पास ले गया और बोला , " महराज , यहाँ रहता है वह । आइए , अंदर देखिए । " शेर ने कुँए में झाँककर देखा । पानी में उसे अपनी ही परछाईं दिखाई दी । उसने उस परछाईं को ही दूसरा शेर समझ लिया और गुस्से में आकर जोर से गर्जना की । उसने देखा कि कुँए का शेर भी उसकी ओर देखकर दहाड़ रहा है । तब शेर अपने गुस्से पर काबू न रख सका । उसने कुएँ में छलाँग लगा दी और पानी में डूबकर मर गया । इस तरह शेर का अंत हो गया ।

शिक्षा - बुद्धि ताकत से बड़ी होती है ।

गधे का दिमाग

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एक था शेर । वह जंगल का राजा था । एक सियार उसका मंत्री था । शेर रोज अपने भोजन के लिये एक जानवर का शिकार करता था । इस शिकार मे से एक हिस्सा सियार को मिलता था । मंत्री के रूप में सेवा करने का यह उसका मेहनताना था ।

एक दिन शेर बीमार हो गया । वह शिकार करने के लिए गुफा से बाहर नहीं जा सका । उसने सियार से कहा , " आज मैं शिकार के लिये बाहर नही जा सकता । पर मुझे बहुत जोर की भूख लगी है । तुम जाओ किसी प्राणी को ले आओ ताकि उसे खाकर मै अपनी भूख मिटा सकूँ । " सियार ने मन में विचार किया , “ कोई जानवर अपनी खुशी से शेर की गुफा मे नही आयेगा ! तो अब मै क्या करूँ ! " बहुत विचार करने पर उसे एक तरकीब सूझी । उसने सोचा " गधा सबसे बेवकूफ प्राणी है । मै उसे झाँसा देकर यहाँ ला सकता हूँ ।

" सियार गधे के पास गया । और बोला , “ गधे भाई में तुम्हारे लिए एक खुशखबरी लाया हूँ । जंगल के राजा ने तम्हे अपना मंत्री बनाने का निश्चय किया है । तुम अभी मेरे साथ चलकर उनसे भेंट कर लो । " यह सुनकर गधे को बहुत खुशी हुई । वह सियार के साथ शेर की गुफा मे गया उसको देखते ही भूखा शेर उस पर टूट पड़ा और उसे मार डाला । फिर उसने सियार से कहा , " मैं नदी में स्नान करके आता हूँ । तब तक तुम इस शिकार का ख्याल रखना । " शेर नदी की ओर चला गया । सियार भी बहुत भूखा था । शेर के वापस आने से पहले वह गधे के दिमाग को चट कर गया । जब शेर वापस लौटा उसने गधे की ओर देखा कहा “ इस प्राणी का दिमाग कहाँ है ?

" सियार ने मुस्कराते हुए कहा , “ महाराज अगर गधे को दिमाग होता तो क्या वह यहाँ आता । गधे को तो दिमाग होता ही नही । "
शिक्षा - धूर्त अपनी चालाकी से नही चूकता


नमक का व्यापारी और गधा

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     नमक के एक व्यापारी के पास एक गधा था । वह व्यापारी रोज सुबह अपने गधे पर नमक की बोरियाँ लादकर आस पास के गाँवो मे नमक बेचने ले जाया करता था । आसपास के गाँवो में जाने के लिए उसे कई नाले और छोटी - छोटी नदियाँ पार करनी पड़ती थीं । एक दिन नदी पार करते समय गधा अचानक पानी में गिर पड़ा इससे गधे के शरीर पर लदा हुआ ढेर - सारा नमक पानी में घुल गया अब गधे का बोझ काफी हल्का हो गया । उस दिन गधे को अच्छा आराम मिल गया ।

दूसरे दिन वह व्यापारी रोज की तरह गधे पर नमक की बोरियाँ लाद कर नमक बेचने निकला । उस दिन पहले नाले को पार करते समय गधा जानबूझ कर पानी मे बैठ गया ।
उसकी पीठ का बोझ फिर हल्का हो गया । व्यापारी उस दिन भी गधे को लेकर वापस लौट आया । पर नमक के व्यापारी के ध्यान मे आ गया कि आज गधा जानबूझकर पानी मे बैठ गया था । उसे गधे पर बहुत गुस्सा आया । इसलिए डंडे से उसने गधे की खूब पिटाई की । उसने कहा , " मूर्ख प्राणी , तू मुझसे चालाकी करता है । मैं तुझे सबक सिखाए बिना नही रहूगाँ । " अगले दिन व्यापारी ने गधे पर रूई के बोरे लादे गधे ने फिर वही तरकीब आजमाने की कोशिश की , नाला आते ही वह पानी मे बैठ गया । इस बार उल्टा ही हुआ । रूई के बोरो ने खूब पानी सोखा और गधे की पीठ का बोझ पहले से कई गुना बढ़ गया । पानी से बाहर आने मे गधे को खूब मेहनत करनी पड़ी । उस दिन के बाद से गधे ने पानी मे बैठने की आदत छोंड दी ।
शिक्षा - मूर्ख सबक सिखाने से ही काबू में आते

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